सुरक्षा परिषद में चीन और पाकिस्तान से भिड़े भारतीय विदेश मंत्री
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार शाम संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में नाम लिए बिना चीन की आलोचना की।
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया जब आतंकवाद का सामना करने के लिए एक साथ, एक मंच पर आ रही है तब आतंकवाद फैलाने वालों का बचाव करने के लिए बहुपक्षीय मंचों का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी पर भी निशाना साधा और कहा कि ओसामा बिन लादेन को पनाह देना और पड़ोसी देश की संसद पर हमला करना आपको उस सभा में ज्ञान देने का आधार नहीं देता।
एस जयशंकर ने ये बातें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओपन डिबेट की अध्यक्षता करते हुए कही। इसके साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों की संख्या बढ़ाए जाने का मुद्दा भी उठाया।
भारतीय विदेश मंत्री का कहना था कि सुधार इस समय की सबसे बड़ी मांग है। उन्होंने कहा कि हम सभी जानते हैं कि समान प्रतिनिधित्व और सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों की संख्या में वृद्धि का सवाल पिछले तीन दशकों से संयुक्त राष्ट्र की महासभा का उद्देश्य रहा है, सुधारों को लेकर जारी बहस भटकती रही है, लेकिन इस दौरान असल दुनिया नाटकीय अंदाज़ में बदल गयी।
इस दौरान पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने कहा कि अगर आप बहुपक्षीय मंचों को सफल होते देखना चाहते हैं तो आप कश्मीर से जुड़े यूएनएससी प्रस्ताव को अनुमति देकर ये साबित कर सकते हैं कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद आपकी अध्यक्षता में सफ़लतापूर्वक हमारे क्षेत्र में शांति ला सकता है।
इसके जवाब में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि ओसामा बिन लादेन को पनाह देना और पड़ोसी देश की संसद पर हमला करना आपको इस सभा में भाषण देने का आधार नहीं देता।
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