जोशीमठ संकट गहराया, मामले को सेन्सर करने पर बल
भारत के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने दर्जन भर सरकारी संस्थानों और वैज्ञानिक संगठनों को उत्तराखंड के चमोली ज़िले के जोशीमठ शहर में भू-धंसाव के संबंध में मीडिया से बातचीत या सोशल मीडिया पर डेटा साझा न करने का निर्देश दिया है।
निर्देश में कहा गया है कि उनके द्वारा की गई ‘स्थिति की व्याख्या’ न सिर्फ़ प्रभावित निवासियों, बल्कि देश के नागरिकों के बीच भी भ्रम पैदा कर रही है।
भारतीय अतंरिक्ष अनुसंधान संगठन "इसरो" के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर द्वारा 13 जनवरी को जारी एक प्रारंभिक रिपोर्ट, जो जोशीमठ के कुछ हिस्सों में ‘तेजी से धंसाव’ की घटना दिखाती है, को एनआरएससी की वेबसाइट से हटा दिया गया है।
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2022 से 7 महीनों की अवधि में जोशीमठ शहर के भीतर 8.9 सेंटीमीटर तक ‘धीमा धंसाव’ दर्ज किया गया था। इसरो के ‘कार्टोसेट-2एस’ उपग्रह के डेटा ने 27 दिसंबर 2022 से 8 जनवरी 2023 के बीच सिर्फ 12 दिनों में करीब 5.4 सेंटीमीटर ‘तीव्र धंसाव’ दर्ज किया था।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शहर के मध्य भाग में तेजी से धंसाव हुआ है। इसमें कहा गया है मुख्य धंसाव क्षेत्र जोशीमठ-औली रोड के पास 2,180 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
शनिवार को एनआरएससी के अधिकारी इस पर टिप्पणी करने के लिए उपलब्ध नहीं थे कि रिपोर्ट क्यों हटाई गई। इसरो के प्रवक्ता को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला।
लेकिन उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत ने संडे एक्सप्रेस को बताया कि इसरो की रिपोर्ट को लेकर जोशीमठ में दहशत है, इसलिए उन्होंने इसरो के निदेशक से बात की और उनसे रिपोर्ट हटाने को कहा। (AK)
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