सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री की आलोचना करने वाला न्यायाधीश बन सकता है!
भारत के सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने कहा है कि एक वकील न्यायाधीश के पद के लिए सिर्फ़ इसलिए अनुपयुक्त नहीं हो जाता, क्योंकि उसने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री की आलोचना करने वाले एक समाचार लेख को साझा किया था।
उन्होंने 2017 में एक मेडिकल उम्मीदवार की आत्महत्या के बारे में अपनी राय व्यक्त की थी क्योंकि वह प्लस टू परीक्षा में अच्छा अंक पाने के बावजूद एक सीट पाने में असमर्थ रही थी।
कॉलेजियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ ने 16 फरवरी, 2022 को पिछले कॉलेजियम द्वारा मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में अधिवक्ता आर. जॉन सत्यन को पदोन्नत करने की सिफारिश को दोहराते हुए यह टिप्पणी की।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, 17 जनवरी को हुई कॉलेजियम की बैठक के संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि उक्त सिफारिश सभी परामर्शदाता न्यायाधीशों की सहमति से की गई थी, जिन्होंने अधिवक्ता सत्यन को पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाया था।
इंटेलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि उनकी एक अच्छी व्यक्तिगत और पेशेवर छवि है और उनकी सत्यनिष्ठा के ख़िलाफ़ कुछ भी प्रतिकूल नहीं मिला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उनका कोई राजनीतिक झुकाव नहीं है, रिपोर्ट में एकमात्र प्रतिकूल टिप्पणी उसके द्वारा सोशल मीडिया में किए गए कुछ पोस्ट के संबंध में थी। (AK)
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