क्या भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी प्रतिबंध लग गया है?
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दिल्ली पुलिस ने कश्मीर में मीडिया ब्लैकआउट और सरकार के दमन पर चर्चा करने के लिए एक और कार्यक्रम की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। यह कार्यक्रम बुधवार 15 मार्च को गांधी पीस फाउंडेशन में आयोजित किया जाने वाला था।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Mar १६, २०२३ ११:०८ Asia/Kolkata
  • क्या भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी प्रतिबंध लग गया है?

दिल्ली पुलिस ने कश्मीर में मीडिया ब्लैकआउट और सरकार के दमन पर चर्चा करने के लिए एक और कार्यक्रम की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। यह कार्यक्रम बुधवार 15 मार्च को गांधी पीस फाउंडेशन में आयोजित किया जाने वाला था।

अभी कुछ दिन पहले ही दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा ‘वर्तमान भारत के संदर्भ में फासीवाद को समझना’ विषय पर एक सेमिनार को रद्द करने के दिल्ली पुलिस के आदेश को रद्द करने कर दिया गया था.

दिल्ली पुलिस ने एक आदेश में कहा कि उसके पास ऐसे इनपुट हैं कि अगर कार्यक्रम होने दिया गया तो क़ानून और व्यवस्था की समस्या हो सकती है।

दिल्ली पुलिस की ओर से कहा गया है कि उसे मिले इनपुट में बताया गया है कि यह कार्यक्रम एक ‘गुमनाम ग्रुप’ द्वारा आयोजित किया जा रहा था और आयोजकों से संपर्क करने के प्रयास असफल रहे।

सेमिनार की घोषणा करने वाले पोस्टर में काफी प्रसिद्ध आयोजकों की एक लंबी सूची है, जैसे कि स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन, दिल्ली टीचर्स फोरम और नेशनल अलायंस ऑफ पीपल्स मूवमेंट्स। इन सभी संगठनों के कार्यालय दिल्ली में हैं और ये विभिन्न मुद्दों पर काफी सक्रिय रहते हैं।

इसी तरह वक्ताओं में भी देश के विभिन्न हिस्सों के प्रसिद्ध लोग थे. इनमें जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश हुसैन, जम्मू कश्मीर से माकपा के पूर्व विधायक एमवाई ताहिरगामी, सेंट स्टीफेंस कॉलेज में प्रोफेसर नंदिता नारायण, प्रसिद्ध डॉक्यूमेंट्री निर्माता संजय काक और टिप्पणीकार अनिल चमड़िया मसूदी शामिल थे।

मालूम हो कि इससे पहले विद्वानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, अधिवक्ताओं और राजनेताओं के सामूहिक मंच ‘भारत बचाओ’ द्वारा ‘वर्तमान भारत के संदर्भ में फासीवाद को समझना’ विषय पर  आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार की दिल्ली पुलिस ने अनु​मति नहीं दी थी। (AK)

 

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