तालेबान के नए सरग़ना का चयन
अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के सरग़ना मुल्ला अख़्तर मंसूर के मारे जाने और हैबतुल्लाह आख़ुन्दज़ादे के इस गुट के नए सरग़ना के रूप में चुने जाने की पुष्टि के साथ ही क़ुन्दूज़ प्रांत के गवर्नर ने तालेबान का हमला बढ़ने यहां तक कि क़ुन्दूज़ पर फिर से तालेबान का क़ब्ज़ा होने की आशंका जतायी है।
लगभग 10 महीने पहले तालेबान के पूर्व सरग़ना मुल्ला उमर के मारे जाने का समाचार सामने आया। इसके कुछ समय बाद तालेबान ने मुल्ला अख़्तर मंसूर की अध्यक्षता में अफ़ग़ानिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों ख़ास तौर पर क़ुन्दूज़ प्रांत पर व्यापक हमला शुरु किया ताकि यह दर्शाए कि तालेबान में अभी भी अफ़ग़ान सरकार का मुक़ाबला करने की क्षमता है।
अफ़ग़ानिस्तान के स्थानीय अधिकारियों को इस बात की चिंता है कि कहीं तालेबान हैबतुल्लाह आख़ुन्दज़ादे की अगुवाई में मुल्ला अख़्तर मंसूर की मौत का बदला लेने के लिए व्यापक हमला न करे। चूंकि आख़ुन्दज़ादे तालेबान के कई धार्मिक मदरसों का प्रिसंपल रह चुका है और अपने छात्रों पर प्रभाव रखता है इसलिए तालेबान के भविष्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
अफ़ग़ान अधिकारियों को आशा है कि तालेबान का नया सरग़ना, मुल्ला अख़्तर की युद्धोन्मादी नीति से पाठ लेकर ऐसी नीति अपनाएगा जिससे इस देश में शांति व स्थिरता लाने में मदद मिलेगी। क्योंकि कहा जा रहा है कि हैबतुल्लाह आख़ुन्दज़ादे की धार्मिक छवि उनकी राजनैतिक छवि पर हावी है। अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रीय, धार्मिक व राजनैतिक हस्तियों को उनसे उम्मीद है कि वे तालेबान का सही मार्गदर्शन करके न सिर्फ़ जनसंहार को रोकेंगे बल्कि अफ़ग़ानिस्तान की शांति प्रक्रिया में तालेबान से सार्थक योगदान दिलाएंगे।(MAQ/T)