एनएसजी में सदस्यता पर भारत में उभरा मतभेद
परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह एनएसजी में भारत की सदस्यता का मुद्दा अब भी चर्चा का विषय बना हुआ है। समूह में सदस्यता प्राप्त करने के भारत के प्रयासों की विफलता के बाद जहां विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि रूकावट दूर करने की कोशिश जारी रहेगी वहीं देश के भीतर परमाणु वैज्ञानिक श्रीनिवासन सहित कई हस्तियों ने कहा है कि भारत को एनएसजी की सदस्यता के लिए अकारण इतनी मेहनत करने की ज़रूरत नहीं थी।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पिकास स्वरूप ने कहा कि भारत का परमाणु कार्यक्रम एनपीटी के नियमों पर पूरा उतरता है और एनएसजी में सदस्यता के मिशन को आगे बढ़ाते हुए भारत पड़ोसी देश चीन से बातचीत जारी रखेगा। भारत के कुछ संचार माध्यमों में सूत्रों के हवाले से ख़बर दी गई है कि इसी साल के आख़िर तक भारत को एनएसजी की सदस्यता मिल जाएगी।
एनएसजी की बैठक में भारत की सदस्यता का चीन ने सहित कुछ देशों ने विरोध किया था।
भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक और परमाणु उर्जा आयोग के सदस्य एम आर श्रीनिवासन अपने बयान में कह चुके हैं कि केंद्र का परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह एनएसजी की सदस्यता के मुद्दे पर जोर देना अनावश्यक, अवांछित और ग़लत सलाह थी। उन्होंने कहा कि अगर इस बारे में परमाणु उर्जा आयोग से सलाह ली जाती तो वह सरकार को इससे बचने को कहता।
भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि भारत को एनएसजी की सदस्यता नहीं लेनी चाहिए। यहां तक कि भारत को वहां आवेदक के रूप में जाने की भी जरूरत नहीं है। सिंहा ने कहा कि सरकार में बैठे हुए कुछ लोगों द्वारा भारत सरकार को लगातार गुमराह किया जा रहा है।
एनएसजी के मुद्दे को लेकर उन्होंने कहा कि इस मामले में मैं यहीं कहना चाहता हूं कि भारत को एनएसजी की सदस्यता स्वीकार नहीं करनी चाहिए। क्योंकि ऎसी कोई आवश्यकता नहीं है कि एनएसजी के लिए आवेदन किया जाए। बीजेपी नेता ने कहा कि यदि भारत को आज एनएसजी की सदस्यता मिल जाती है, तो हम लूजर होंगे। यह हमारे लिए एक नुकसानदायक कदम ही होगा, न कि फायदेमंद।