साम्राज्य की जड़ों को हिला देने वाले कास्त्रो के साहस को सलाम
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1960 में अमरीकी साम्राज्य की जड़ों को हिला देने वाले फिदेल कास्त्रो के निधन पर उनकी आत्मा को शत् शत् नमन।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov २६, २०१६ १२:३० Asia/Kolkata
  • साम्राज्य की जड़ों को हिला देने वाले कास्त्रो के साहस को सलाम

1960 में अमरीकी साम्राज्य की जड़ों को हिला देने वाले फिदेल कास्त्रो के निधन पर उनकी आत्मा को शत् शत् नमन।

यह बात अक्सर कही जाती है कि महान क्रांतिकारियों की ज़िन्दगी के बारे में पढ़ने से ज़्यादा बड़ी श्रदांजलि उनके लिए कोई ओर नहीं हो सकती। तो हम उनकी ज़िन्दगी के बारे में कुछ ख़ास बातें जानने की कोशिश करते हैं।

फिदेल कास्त्रो अक्सर कहते थे कि अगर "Surviving Assassination" नाम की कोई प्रतियोगिता ओलंपिक्स में होती तो उसका गोल्ड मैडल उन्हें ही मिलता। आप कास्त्रो की विचारधारा से सहमत हो या न हों, लेकिन आपको उनके साहस को ज़रूर सलाम करना पड़ेगा। सिर्फ 82 लोगों के साथ उन्होंने अमरीका के सबसे करीबी मित्र "बतिस्ता की सरकार" को  उखाड़ फेंका।

 

उनके क्रन्तिकारी क़दमों की वजह से क्यूबा में साक्षरता दर 99.8% है। क्यूबा में छात्र-अध्यापक अनुपात दुनिया में सबसे कम है और क्यूबा के अंदर शिक्षा के ऊपर हथियारों पर ख़र्च के मुक़ाबले 5 गुना ज़्यादा खर्च किया जाता है। उन्होंने 49 साल तक क्यूबा का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया। उनके सबसे करीबी मित्र "चे गेवारा" थे जो सिर्फ 39 वर्ष की आयु में बोलीविया के अंदर अमरीकी जासूस एजेंसी के ख़िलाफ़ लड़ते हुए शहीद हो गए थे।

 

क्यूबा की क्रांति फिदेल कास्त्रो, चे गेवारा और राउल कास्त्रो के नेतृत्व में आरंभ हुई थी। ह्यूगो चावेज़ को भी फिदेल कास्त्रो का काफी करीबी मित्र माना जाता था। जब ह्यूगो चावेज़ जेल से रिहा होने के बाद वो क्यूबा पहुंचे तो क्यूबा में उनका ज़ोरदार स्वागत किया गया। अपनी ज़िंदगी की आखिरी सांस तक उन्होंने साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी। अभी सीरिया में चल रहे युद्ध में भी उन्होंने अपने देश के डॉक्टरों को और कुछ एक्सपर्ट फौजियों को भी सीरियन सरकार की मदद करने के लिए सीरिया में भेजा। अभी अपने 90वें जन्मदिन पर उन्होंने अपने देश के संबोधन में खुद ही बता दिया था कि उनकी मृत्यु बहुत ही निकट है, उन्हें खुद ही ये आभास हो गया था कि अब वो दुनिया को छोड़ने वाले हैं। फिदेल कास्त्रो को आने वाली पीढियां अमरीकी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ संघर्ष के प्रतीक के रूप में याद करेंगी। 

 

                       लेखक अभिमन्यु कोहर

                  (लेखक के निजी विचार हैं, पार्स टूडे का सहमत होना ज़रूरी नहीं। )