राष्ट्र के नाम राष्ट्रपति मुखर्जी का संदेश
भारतीय राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि हमारी अर्थव्यवस्था चुनौतीपूर्ण वैश्विक गतिविधियों के बावजूद अच्छा प्रदर्शन कर रही है।
भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस देश के गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित किया। अपने संबोधन में प्रणव मुखर्जी ने कहा कि मैं 68वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर मैं देशवासियों को बधाई देता हूं।
गणतंत्र दिवस की पूर्वसंध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन में भारतीय राष्ट्रपति ने जोर दिया कि देश की ताक़त इसकी बहुलतावाद और विविधता में निहित है। उन्होंने कहा कि देश में पारंपरिक रूप से तर्कों पर आधारित भारतीयता का ज़ोर रहा है न कि असहिष्णु भारतीयता का। भारत के राष्ट्रपति का कहना था कि हमारे देश में सदियों से विविध विचार और दर्शन, एक-दूसरे के साथ शांतिपूर्ण ढंग से प्रतिस्पर्धा करते रहे हैं। उनका कहना था कि लोकतंत्र के फलने-फूलने के लिए बुद्धिमतापूर्ण और विवेकसम्मत मन की जरूरत है। प्रणब मुखर्जी ने भारतीय लोकतंत्र की ताकत को रेखांकित किया लेकिन संसद और राज्य विधानसभाओं में व्यवधान के प्रति सचेत भी किया।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने संबोधन में लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ कराने की पुरजोर वकालत करने के साथ ही नोटबंदी का समर्थन किया। प्रणब मुखर्जी ने चुनाव आयोग से कहा कि वह राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श करके दोनों चुनाव साथ कराने के विचार को आगे बढ़ाए।
उन्होंने कहा कि काले धन को निष्क्रय करते हुए भ्रष्टाचार से संघर्ष एवं विमुद्रीकरण से आर्थिक गतिविधि में कुछ समय के लिए मंदी आ सकती है। भारतीय राष्ट्रपति ने डिजिटल पेमेंट की तारीफ करते हुए कहा कि इससे लेनदेन में भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।