तीन तलाक़ बिल संसद में पारित
भारत की लोकसभा ने गुरूवार को मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2017 को अपनी मंज़ूरी दे दी।
दिनभर चली चर्चा के बाद बिल के पक्ष और विपक्ष में सदस्यों ने अपने-अपने विचार रखे। भारत सरकार की तरफ से केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बिल पेश किया वहीं पर विपक्ष की ओर से एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी बिल के कई प्रावधानों का विरोध किया।
इस क़ानून के बाद अब कोई भी मुस्लिम पति अगर पत्नी को तीन तलाक देगा तो वह ग़ैर क़ानूनी होगा। नए क़ानून के हिसाब से तीन तलाक अवैध होगा, चाहे वह मौखिक हो, लिखित और या मैसेज आदि किसी भी रूप में। अब अगर कोई तीन तलाक देता है तो उसपर तीन साल की सजा के साथ जुर्माना होगा। इसमें मजिस्ट्रेट तय करेगा कि कितना जुर्माना होगा।
लखनऊ से मोहसिन रिज़वी की रिपोर्ट सुनेंः तीन तलाक़ बिल संसद में पेश
इस बिल के मुताबिक पीड़ित महिला मजिस्ट्रेट से नाबालिग बच्चों के संरक्षण का भी अनुरोध कर सकती है। मजिस्ट्रेट इस मुद्दे पर अंतिम फैसला करेंगे। प्रस्तावित कानून जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू होगा है। तीन तलाक़ पर कानून बनाने के लिए नरेन्द्र मोदी ने एक मंत्री समूह बनाया था, जिसमें राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, रविशंकर प्रसाद, पीपी चौधरी और जितेंद्र सिंह शामिल थे।
ओवैसी ने इसमें तीन संसोधन की मांग रखी थी जिसे सदस्यों ने पूरी तरह से ख़ारिज कर दिया।