भारत और अमेरिका का संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास शुरू
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग और सामरिक संबंधों को और अधिक मज़बूत बनाने के लिए संयुक्त युद्ध अभ्यास रविवार से आरंभ हुआ।
प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार रक्षा सहयोग एवं सामरिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के लिए भारत और अमेरिका के बीच “संयुक्त युद्ध अभ्यास 2018′ उत्तराखंड राज्य के रानीखेत स्थित चौबटिया क्षेत्र में रविवार से प्रारम्भ हो गया है। पहली बार इस युद्धाभ्यास को डिवीजन हेडक्वार्टर स्तर तक उच्चीकृत किया गया है। इस सैन्य अभ्यास के आरंभ में सबसे पहले भारत और अमेरिका के ध्वजारोहण के साथ दोनों देशों का राष्ट्रगान हुआ।
फ्लैग मार्च के बाद संयुक्त सेनाओं ने अमेरिका के मेजर जनरल विलयम ग्राह्म व भारत की सेना के 99वीं ब्रिगेड के मेजर जनरल कविंद्र सिंह के नेतृत्व में शानदार मार्चपास्ट कर सलामी दी। इसके बाद दोनों देशों के जवानों ने चैबटिया व आस-पास के वन क्षेत्रों में चलने वाले इस युद्ध अभ्यास में भाग लिया। संयुक्त सैन्य अभ्यास पर्वतीय जटिल परिस्थितियों में काउंटर इंसर्जेसी एवं काउंटर आतंकवाद के तहत दोनों देशों के बीच यह 14वां सैन्याभ्यास है।
दिल्ली से अहमद काज़मी की रिपोर्टः भारत और अमेरिका के बीच सबसे बड़ा संयुक्त युद्धाभ्यास शुरू
उल्लेखनीय है कि दोनों देशों के जवानों के मार्च पास्ट के बाद अमेरिकी सेना के मेजर जनरल विलयम ग्राह्म व भारतीय सेना के मेजर जनरल कविंद्र सिंह ने अपने-अपने संबोधन में जवानों को संयुक्त सैन्य अभ्यास के विषय में जानकारी दी। दो सप्ताह तक चलने वाले इस संयुक्त युद्धाभ्यास में भारत की ओर से कांगो ब्रिगेड, गरुड़ डिवीज़न व सूर्य कमान की एक बटालियन भाग ले रही है, जबकि अमेरिका की तरफ़ से 1-इंफैंट्री बटालियन, 23 इंफैंट्री रेजीमेंट, 2 स्ट्राइकर ब्रिगेड, काम्बैट टीम व 7 इंफैंट्री डिवीज़न की एक कंपनी युद्धाभ्यास में भाग ले रही है।
इस युद्धाभ्यास का उद्देश्य बताते हुए भारत की ओर से जनरल ऑफिसर कमांडिंग, गरुड़ डिवीज़न कविंद्र सिंह ने युद्धाभ्यास के परिदृश्य में भारत-अमेरिका के मज़बूत होते रिश्तों पर प्रकाश डाला। लोकतंत्र, स्वतंत्रता, समानता व न्याय की साझा मान्यताओं पर प्रकाश डालते हुए इन्हें दोनों देशों के लिए अहम बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दुनिया आतंकवाद की समस्या से जूझ रही है। युद्धाभ्यास संयुक्त राष्ट्र शांति संरक्षण परिदृश्य में विद्रोह और आतंकवाद का सामना करने की दिशा में सामरिक और तकनीकी कौशल को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण साबित होगा। (RZ)