क़ालीबाफ़: किसी भी अतिक्रमण का जवाब तेज़ और पश्चातापकारी होगा
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पार्सटुडे – ईरान की इस्लामी संसद के अध्यक्ष ने अमेरिकी राष्ट्रपति के रुख के जवाब में संसद की खुली बैठक में कार्यसूची से पहले अपने भाषण में चेतावनी दी कि किसी भी अतिक्रमण और साहसिक कार्रवाई का जवाब पश्चातापकारी और तेज़ होगा।
(last modified 2026-09-29T11:15:06+00:00 )
Sep २९, २०२६ १६:४३ Asia/Kolkata
  • मोहम्मद बाक़िर क़ालीबाफ़, ईरान की इस्लामी संसद के अध्यक्ष
    मोहम्मद बाक़िर क़ालीबाफ़, ईरान की इस्लामी संसद के अध्यक्ष

पार्सटुडे – ईरान की इस्लामी संसद के अध्यक्ष ने अमेरिकी राष्ट्रपति के रुख के जवाब में संसद की खुली बैठक में कार्यसूची से पहले अपने भाषण में चेतावनी दी कि किसी भी अतिक्रमण और साहसिक कार्रवाई का जवाब पश्चातापकारी और तेज़ होगा।

पार्सटुडे की रिपोर्ट के अनुसार ईरान की इस्लामी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर क़ालीबाफ़ ने आज मंगलवार को इस संसद की खुली बैठक में कहा कि जिस राष्ट्र का इतिहास में इतना शानदार और गहरा रिकॉर्ड है, उसे कभी भी घेराबंदी और धमकी से डराया नहीं जाना चाहिए। यदि अमेरिकी दुश्मन का गणना तंत्र इस मूलभूत सत्य को नहीं समझता, तो वह ईरानी राष्ट्र से भारी तमाचे खाने के चक्र में फँसा रहेगा। बेशक संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी राष्ट्रपति के हल्के-फुल्के रुख और महान तथा सभ्यता-निर्माता ईरानी राष्ट्र के प्रति दुस्साहस ने दिखा दिया कि उन्होंने अभी भी अपना व्यवहार नहीं बदला है और ऐसे दुस्साहसों के सामने हमारा जवाब वही पहले का स्पष्ट वचन है: घूमो तो हम भी घूमेंगे! अमेरिकियों को जानना चाहिए कि इस सभ्य राष्ट्र को नष्ट करने की धमकी और डराने का दौर समाप्त हो गया है।

 

क़ालीबाफ़ ने जोर देकर कहा कि व्हाइट हाउस के नेताओं को जानना चाहिए कि बहादुर और इतिहास-निर्माता ईरानी राष्ट्र रेखाएँ खींचकर, बयानबाजी या हवाई और व्यापारिक नाकाबंदी से कभी पीछे नहीं हटेगा और इस्लामिक गणराज्य ईरान का जवाब किसी भी अतिक्रमण और साहसिक कार्रवाई के लिए कठोर, पश्चातापकारी, सटीक और तेज़ होगा।

 

उन्होंने कहा कि अमेरिका के भ्रमित राष्ट्रपति ने हाल ही में होर्मुज़ जलडमरूमध्य और इस जलडमरूमध्य से जहाज़ों के गुज़रने के बारे में बयानबाजी की जो पिछले दावों की पुनरावृत्ति है और इन खोखले रुखों की सच्चाई सभी जानते हैं। अमेरिकियों और अन्य देशों दोनों को जानना चाहिए: जैसा कि हमने पहले कहा था, जिस क्षेत्र में हम तेल नहीं बेचेंगे, वहाँ कोई तेल नहीं बेच पाएगा और यदि हमारी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हुई, तो कोई भी बुनियादी ढाँचा सुरक्षित नहीं होगा। mm