भारतीय संसद में फिर छाया रहा राफ़ेल डील का मुद्दा
भारतीय संसद की बैठक में एक बार फिर ज़ोरदार हंगामा हुआ और विपक्ष ने सरकार को घेरने का प्रयास किया जबकि सरकार ने भी अपना बचाव किया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने राफ़ेल डील को लेकर केन्द्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने सरकार पर इसके बेस प्राइस को बढ़ाने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता खड़गे ने कहा कि हमें राफेल डील में भ्रष्टाचार का शक है इसलिए हम इसकी जांच को लेकर जेपीसी की मांग कर रहे हैं।
खड़गे ने कहा कि कहां है सीएजी रिपोर्ट? लॉ डिपार्टमेंट ने इस डील का विरोध किया। डिफेंस एक्विजिशन कमेटी ने भी इस सौदे का विरोध किया। इसके बावजूद, यह कांट्रैक्ट एक निजी कंपनी को दिया गया।
खड़गे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र सरकार ने ग़लत हलफ़नामा दिया। केन्द्र ने सुप्रीम कोर्ट और जनता से झूठ बोला है। यही वजह है कि हम जेपीसी की मांग कर रहे हैं।
भारत की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इंटर-गवर्नमेंटल सौमझौते पर 2016 में दस्तखत किए गए। पहला एयरक्राफ्ट 2019 में डिलीवर होगा और आख़िरी 2022 में। हमने इस सौदे को 14 महीने में पूरा किया।
सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस 18 लड़ाकू विमानों को उड़ती हुई हालत में चाहती थी जबकि, बाकी वे भारत में 11 वर्षों के दौरान बनाना चाहती थी। आपकी तरफ से दिए गए समय में फौरन की बात कहां थी। आप 2006 से 16 वर्षों में 18 लड़ाकू विमान तक नहीं ले पाए।
रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि हमारी सीमाएं बेहद संवेदनशील है और समय-समय पर रक्षा सामान खरीदने की ज़रुरत पड़ती है। करगिल के बाद हमने यह सोचा कि हमारे सुरक्षा बलों को और अधिक ताक़त की ज़रूरत है। चीन ने साल 2004 से लेकर 2015 के बीच 400 चौथी और पांचवीं पीढ़ी के नए लड़ाकू विमानों को शामिल किया। पाकिस्तान के दोगुने से भी अधिक लड़ाकू विमान हो गए। साल 2002 में हमारे पास 42 स्क्वैड्रोन थे और 2015 में 33 स्क्वैड्रोन हैं।
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन ने लोकसभा में राफेल पर विपक्ष की तरफ से उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि तथ्यों से कांग्रेस डर रही है। उन्होंने कहा कि रक्षा ख़रीद राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। (AK)