बेटे मोदी के राज में मां गंगा हुई और मैली!
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भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 के चुनाव अभियान में वाराणसी पहुंचने पर कहा था कि, “न मैं आया, न मुझे भेजा गया,  मुझे मां गंगा ने बुलाया है”
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Mar ११, २०१९ १७:२० Asia/Kolkata
  • बेटे मोदी के राज में मां गंगा हुई और मैली!

भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 के चुनाव अभियान में वाराणसी पहुंचने पर कहा था कि, “न मैं आया, न मुझे भेजा गया,  मुझे मां गंगा ने बुलाया है”

नरेंद्र मोदी जब 2014 में भारत के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने सौगंध खाई कि गंगा को पांच वर्षों में साफ़ कर देंगे और इसीलिए उन्होंने राष्ट्रीय गंगा परिषद का गठन किया। नरेंद्र मोदी की सौगंध और उनके प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद बनी समिति से भारत के लोगों में यह आशा जगी थी कि शायद अब वर्षों से मैली पड़ी गंगा साफ़ हो जाएगी। लेकिन मोदी के पांच वर्ष समाप्त हो रहे हैं नए चुनाव का एलान भी हो गया है और तो और गंगा सफाई के लिए बनी भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली “राष्ट्रीय गंगा परिषद” (नेशनल गंगा काउंसिल या एनजीसी) की आज तक एक भी बैठक नहीं हुई है।

भारत की प्रसिद्ध न्यूज़ पोर्टल साइट “द वायर” द्वारा दायर किए गए सूचना के अधिकार आवेदन से  इस बात का ख़ुलासा हुआ है कि नियम के मुताबिक़ साल में कम से कम एक बार इस परिषद की बैठक होनी चाहिए थी लेकिन अक्टूबर वर्ष 2016 में मोदी ने जिस राष्ट्रीय गंगा परिषद का गठन किया था, उसकी मार्च वर्ष वर्ष 2019 तक एक भी बैठक नहीं हो पाई। जबकि इस परिषद का उद्देश्य गंगा नदी का संरक्षण, सुरक्षा और प्रबंधन करना है 7 अक्टूबर 2016 को जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया था कि राष्ट्रीय गंगा परिषद अपने विवेक से हर साल कम से कम एक या एक से अधिक बैठकें आयोजित कर सकती है।

आपको बता दें कि राष्ट्रीय गंगा परिषद के गठन के साथ ही राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (एनजीआरबीए) का विघटन कर दिया गया था। एनजीआरबीए की कार्यप्रणाली लगभग राष्ट्रीय गंगा परिषद की ही तरह थी। इस समिति के भी अध्यक्ष प्रधानमंत्री हुआ करते थे। वर्ष 2009 में कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार के सत्ता में आने के बाद एनजीआरबीए का गठन किया था। इसकी पहली बैठक तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में 5 अक्टूबर 2009 को हुई थी।

गंगा सफाई की दिशा में काम करने वाले पर्यावरणविद् रवि चोपड़ा ने कहा कि राष्ट्रीय गंगा परिषद की एक भी बैठक का न होने से पता चलता है कि भारतीय प्रधानमंत्री गंगा नदी को कितना महत्व देते हैं। उन्होंने कहा, “गंगा को लेकर यह अंतिम निर्णायक बॉडी है, इसकी कम से कम वर्ष में दो बैठक होनी चाहिए थी, अगर मोदी एक भी बैठक नहीं कर पा रहे हैं तो इससे सवाल उठता है कि क्या वास्तव में यह कोई निर्णायक बॉडी है या कोई जुमला है।” कैग और संसदीय समिति समेत कई सरकारी और ग़ैर सरकारी संस्थाओं द्वारा गंगा सफाई को लेकर चिंता जताने के बाद भी राष्ट्रीय गंगा परिषद की एक भी बैठक न करना नरेंद्र मोदी सरकार के गंगा सफाई के दावे पर प्रश्न चिन्ह लगाता है।

इस बीच एनजीआरबीए के सदस्य रहे और भारत में जलपुरुष के नाम से जाने-जाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र सिंह ने गंगा की सफाई न होने पर निराशा जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिखावा कर रहे हैं और गंगा के नाम पर लगातार इस देश की जनता से झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने कहा, “गंगा नदी को हृदय की बीमारी है लेकिन दांत का डॉक्टर उसका इलाज कर रहा है। राजेंद्र सिंह ने मोदी पर आरोप लगाया कि उनकी सरकार ने बांध बनाकर गंगा के प्रवाह को रोक दिया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार कहीं घाट बना रही है तो कहीं  रिवरफ्रंट बना रही है और इसी तरह वॉटरवेज बनाए जा रहे हैं, चार धाम परियोजना के ज़रिये सारा हिमालय काटकर गंगा में डाल रहे हैं, यह गंगा को ख़त्म करने की तरीक़े हैं, इससे गंगा कभी साफ़ नहीं होगी।”

मोदी के भारत के प्रधानमंत्री बनने के बाद अरबों रुपया, गंगा की सफाई के नाम पर ख़र्च किया जा चुका है लेकिन इन सबके बावजूद मोदी सरकार द्वारा शुरू की गईं गंगा परियोजानाएं सवालों के घेरे में हैं। दिवंगत पर्यावरणविद् प्रो. जीडी अग्रवाल नरेंद्र मोदी को लिखे अपने पत्रों में यह सवाल उठाते रहे थे कि सरकार द्वारा इन चार सालों में गंगा सफाई के लिए जिन परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है वो कॉरपोरेट सेक्टर और व्यापारिक घरानों के फ़ायदे के लिए हैं, गंगा को अविरल बनाने के लिए नहीं। मालूम हो कि 112 दिनों तक आमरण अनशन पर रहे प्रोफेसर अग्रवाल ने गंगा सफाई को लेकर नरेंद्र मोदी को तीन बार पत्र लिखा था हालांकि उन्होंने किसी भी पत्र का जवाब नहीं दिया।

राजेंद्र सिंह ने कहा, “एनजीबीआरए में हमारी बात सुनी जाती थी, जो हम कहते थे, वो होता था, अगर कोई कठिनाई होती थी तो तात्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हमें ख़ुद बुलाकर बात करते थे, लेकिन, वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी विशेषज्ञों से बात करना ज़रूरी नहीं समझते हैं, जो गंगा के लिए सच्ची बात बोलने वाले लोग हैं उन्हें मोदी बिल्कुल नहीं पूछते हैं और न ही उनसे सलाह लेते हैं, गंगा के नाम पर हज़ारों करोड़ बांट दिए गए लेकिन गंगा की सेहत पर रत्ती भर काम नहीं हुआ।” (रविश ज़ैदी)