बीजेपी की पांच वर्षों में क्या सबसे बड़ी उपलब्धि पुलवामा हमला है?
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भारत में 11 अप्रैल से आरंभ हुए आम चुनाव के तीन चरण पूरे हो चुके हैं और अब तक सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी अपने पुराने वादों का उल्लेख न करके इस बार केवल पाकिस्तान और पुलवामा हमले को आधार बनाकर वोट मांग रही है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Apr २७, २०१९ ११:०५ Asia/Kolkata
  • बीजेपी की पांच वर्षों में क्या सबसे बड़ी उपलब्धि पुलवामा हमला है?

भारत में 11 अप्रैल से आरंभ हुए आम चुनाव के तीन चरण पूरे हो चुके हैं और अब तक सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी अपने पुराने वादों का उल्लेख न करके इस बार केवल पाकिस्तान और पुलवामा हमले को आधार बनाकर वोट मांग रही है।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत के राजस्थान राज्य के जालोर क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि यह भारत की सुरक्षा को सुनिश्चित करने का चुनाव है, यह देश के शहीदों का बदला लेने का चुनाव है, यह आतंकियों को एक सबक सिखाने का चुनाव है। उन्होंने कहा, ‘यह पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने का चुनाव है। शाह ने लोगों से पूछा कि, 'आप बताइए मुझे क्या मोदी जी के अलावा कोई आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दे सकता है? क्या कोई मोदी के अलावा पाकिस्तान को कोई सबक़ सीखा सकता है?' इससे पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अपना संबोधन पुलवामा हमले में मारे गए सीआरपीएफ़ के जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए शुरू किया। उन्होंने कहा कि मारवाड़ क्षेत्र को साहस और बहादुरी के लिए जाना जाता है और राजस्थान के पोकरण में ही परमाणु का विस्फोट किया गया था।

इस बीच भारत के ज़्यादातर राजनीतिक टीकाकारों और जानकारों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और नरेंद्र मोदी सहित इस पार्टी के सभी नेता 2014 के अपने चुनावी घोषणापत्र में किए गए लुभावने वादों को भूल कर विकास का नाम लिए बिना, 2019 के चुनाव में केवल पाकिस्तान और पुलवामा हमले का उल्लेख करके वोट मांग रहे हैं। टीकाकारों का मानना है कि इसके कई कारण हो सकते हैं जिसकी वजह से बीजेपी अपने 2014 के घोषणापत्र को नाम भी नहीं लेना चाहती। पहला कारण या तो बीजेपी ने अपने वादों को पूरा नहीं किया है और सच भी यही है बीजेपी ने जो भी वादे इससे पहले वाले चुनाव में किए थे उनमें से शायद ही कोई पूरी तरह से पूरे हुए हों। दूसरा कारण भारत की जनता अपने देश के वीर सैन्य जवानों के प्रति बहुत ही संवेदनशील है, इसी बात को भुनाने के लिए बीजेपी 2019 के चुनाव में राष्ट्रवाद, पाकिस्तान और पुलवामा के नाम पर वोट मांग रही है ताकि देश के लिए क़ुरबानी देने वाले जवानों के नाम पर भारत की जनता उन्हें वोट दे दे।

उल्लेखनीय है कि 14 फ़रवरी 2019 में कश्मीर में हुए एक आत्मघाती आतंकी हमले में 44 भारतीय सुरक्षा बलों की मौत हो गई थी। पुलवामा हमले के संबंध में भारतीय सुरक्षा मामलों के जानकारों का यह भी मानना है कि सीआरपीएफ़ जवानों के कारवां पर हुआ आतंकी हमला स्वयं भारतीय सुरक्षा एजेंसियों बहुत बड़ा विफलता थी जिसपर भारतीय मीडिया सहित स्वयं नरेंद्र मोदी सरकार ने पर्दा डाल दिया और अब जवानों के नाम पर वोट मांग रहे हैं। (रविश ज़ैदी)