जम्मू कश्मीर में फोन तथा इंटरनेट बंद, निषेधाज्ञा लागू
भारत नियंत्रित जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने के साथ ही कश्मीर में लागू धारा 144 की वजह से वहां पर बंद की स्थिति है।
संचार माध्यमों के अनुसार वहां की सड़कों पर सुरक्षा बलों का डेरा है। 4 अगस्त से संचार के सभी माध्यम लगभग बंद हैं जिनमें लैंडलाइन, मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट और ब्रॉडबैंड सेवाएं शामिल हैं। इसके अलावा राज्य के प्रमुख दलों के कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है। कश्मीर में बंद की स्थिति के बीच कश्मीर के बाहर रहने वाले लोग वहां रह रहे अपने परिवार और मित्रों की खोज खबर और वहां की स्थिति जानने के लिए चिंतित हैं। वहीं प्रशासन का कहना है कि कश्मीर में हालात शांतिपूर्ण हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला, पीडीपी की महबूबा मुफ्ती तथा जम्मू कश्मीर पीपल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन को 5 अगस्त से गिरफ्तार किए जाने के बाद उनकी कोई खबर नहीं है। जम्मू कश्मीर प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 100 से अधिक राजनेताओं और कार्यकर्ताओं को घाटी में गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने गिरफ्तारी के संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी। कुछ सूत्रों ने गिरफ़्तार किये जाने वालों की संख्या 500 तक बताई है। सुरक्षा कारणों से जम्मू कश्मीर में स्कूल और कॉलेज में कक्षाओं को निलंबित कर दिया गया है और परीक्षाएं भी स्थगित कर दी गई हैं। बीते चार अगस्त को जारी सरकारी आदेश के अनुसार लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध है और शिक्षण संस्थान भी बंद रहेंगे। सार्वजनिक बैठकें करने या रैली निकालने पर पूर्ण प्रतिबंध है।
अधिकारियों ने कहा कि पुंछ जिले के एक इलाके में सरकार के कदम के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी की एक घटना की जानकारी मिली है। इस घटना में एक पुलिस अधिकारी को मामूली चोटें आई है। अधिकारी ने कहा कि जम्मू शहर समेत जम्मू क्षेत्र के सभी जिलों में पाबंदियां लागू हैं और पूरे राज्य में शिक्षण संस्थान बंद रहे। करगिल में अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाये जाने को लेकर बंद रखा गया।
उल्लेखनीय है कि भाजपा नेतृत्व वाली सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बांटने की घोषणा के बाद यह स्थिति उत्पन्न हुई है।