भारत की जनता मोदी को क्यों हिटलर कह रही है?
पूरे भारत में विवादित नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर विरोध-प्रदर्शनों का सिलसिला रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। इन प्रदर्शनों में अबतक 30 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि घायलों की संख्या सैकड़ों में जा पहुंची है।
भारतीय सरकार की ओर से बर्बरतापूर्वक बल प्रयोग के बावजूद इन विरोध-प्रदर्शनों में कोई कमी नहीं आ रही है बल्कि दिन प्रतिदिन इसमें और वृद्धि देखने को मिल रही है। जहां एक ओर भारत की मोदी सरकार इन प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाने की कोशिश कर रही है वहीं इस देश की जनता अब मोदी को हिटलर से मिलाना शुरू कर दिया है।
2014 में सत्ता संभालने के बाद से मोदी सरकार अपनी अबतक की सबसे मुश्किल चुनौती से जूझ रही है। लाखों लोग उस विवादित क़ानून के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतर रहे हैं जिसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से आने वाले ग़ैर मुस्लिमों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है। इन प्रदर्शनों में अब तक ग़ैर-आधिकारिक तौर पर 30 लोग मारे जा चुके हैं। सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के नेता इन प्रदर्शनों से हैरान हैं, उनका कहना है कि इस क़ानून पर मुस्लिम समुदाय की तरफ़ से वे कुछ विरोध की उम्मीद तो कर रहे थे, लेकिन उन्होंने यह नहीं सोचा था कि बाक़ी समुदाय के लोग भी इसके ख़िलाफ़ अलग-अलग शहरों में सड़कों पर निकल आएंगे। साथ ही अब यह प्रदर्शन बड़े-बड़े शहरों से निकलकर छोटे-छोटे शहरों और गांव तक पहुंच गया है। सबसे मुख्य चीज़ इन प्रदर्शनों में जो अब देखने को मिल रही है वह यह है कि प्रदर्शनकारी अपने हाथों में ऐसे फ़ोटो लिए हुए हैं कि जिसपर हिटलर और मोदी की एक साथ तस्वीर है और मोदी को हिटलर से मिलाया गया है।
यह फ़ोटो उस समय वायरल हो गई जब एक जर्मनी के टीवी चैनल ने “तानाशाह हिटलर के हाथों में मोदी” वाले पोस्टर को अपने समाचार का भाग बनाकर दिखाया। जर्मन न्यूज़ चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक़, सीएए और एनआरसी का विरोध करने वाले प्रदर्शनकारियों के हाथों में ऐसे प्लेकार्ड और फ़ोटो थे कि जिसपर यह लिखा था कि मोदी और हिटलर में कोई अंतर नहीं है। जर्मन चैनल से प्रकाशित होने के बाद से यह फ़ोटो पूरी दुनिया में वायरल हो गई है। इस समय सोशल मीडिया पर मोदी और हिटलर की फोटो बहुत तेज़ी से वायरल हो रही है। जानकारों का कहना है कि, इस तरह की फोटो का भारतीय जनता द्वारा अपने प्रदर्शनों में लेकर निकलना, दुनिया के लिए एक बड़ा संदेश भी हो सकता है कि, कहीं भारत तानाशाही की ओर तो नहीं बढ़ रहा है। भारतीय मामलों के जानकारों का कहना है कि अगर नरेंद्र मोदी अपने गृह मंत्री अमित शाह और इस देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी को इसी तरह छूट देते रहे तो वह दिन दूर नहीं कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को बहुत गहरा नुक़सान पहुंचेगा। (RZ)