शाहीन बाग़, सुप्रीम कोर्ट और सरकार, ऊंट किस करवट बैठेगा
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धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाले नागरिकता के नए क़ानून सीएए के ख़िलाफ़ पिछले 65 दिनों से दिल्ली के शाहीन बाग़ में धरने पर बैठी महिलाओं से बातचीत के लिए बुधवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त किए गए मध्यस्थ वहां पहुंचे।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Feb २०, २०२० १३:५० Asia/Kolkata
  • शाहीन बाग़, सुप्रीम कोर्ट और सरकार, ऊंट किस करवट बैठेगा

धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाले नागरिकता के नए क़ानून सीएए के ख़िलाफ़ पिछले 65 दिनों से दिल्ली के शाहीन बाग़ में धरने पर बैठी महिलाओं से बातचीत के लिए बुधवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त किए गए मध्यस्थ वहां पहुंचे।

शाहीन बाग़ से प्रेरणा लेकर भारत के 300 से ज़्यादा शहरों में महिलाएं सीएए के ख़िलाफ़ रात-दिन धरनें पर बैठी हुई हैं, इसलिए शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों का कोई भी फ़ैसला इन सभी धरनों के बल्कि पूरे आंदोलन के भविष्य को तय करेगा।

सुप्रीम कोर्ट के मध्यस्थों के लिए आंदोलनकारी महिलाओं से बातचीत करना इतना आसान नहीं होगा, इसलिए कि मोदी सरकार सीएए पर एक इंच भी पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है तो वहीं शाहीन बाग़ धरने पर बैठी महिलाओं का भी कहना है कि वह आख़िरी सांस तक इस भेदभाव करने वाले और संविधान विरोधी क़ानून के ख़िलाफ़ शांति के साथ धरने पर बैठने के लिए तैयार हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थों को यह ज़िम्मेदारी सौंपी है कि वह शाहीन बाग़ की औरतों से बात करके उन्हें धरना स्थल बदलने के लिए तैयार करें और दिल्लो को नौएडा से जोड़ने वाले बंद पड़े हाईवे को ख़ुलवा दें।

कोर्ट ने मध्यस्थों को एक कठिन ज़िम्मेदारी सौंपी है, इसलिए कि प्रदर्शनकारी महिलाएं यह बात अच्छी तरह से जानती हैं कि अगर धरना का स्थान बदला जाता है तो वह सरकार जिसने दो 65 दिन बीत जाने के बाद भी बातचीत के लिए उनसे संपर्क नहीं कया है या उन्हें उनकी मांगों को लेकर कोई आश्वासन नहीं दिया है, वह 65 साल बीत जाने पर भी उनकी मांगों पर कान नहीं धरेगी।

ऐसी स्थिति में सुप्रीम कोर्ट को चाहिए कि सीएए से जुड़ी उन सैकड़ों शिकायतों पर जल्दी सुनवाई करके अनपा फ़ैसला दे, जिनमें इस क़ानून को संविधान विरोधी और धर्म के आधार पर मुसलमानें के साथ भेदभाव करने वाला बताया गया है।

बुधवार को प्रदर्शनकारी महिलाओं से पहले दीन की बातचीत के बाद, वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने कहा है कि बुधवार की बातचीत सिर्फ़ एक शुरूआत थी और रविवार 23 फ़रवरी तक वे रोज़ाना प्रदर्शनकारियों से बात करेंगे।

शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों ने भी ट्वीट करके बातचीत शुरू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के मध्यस्थों का शुक्रिया अदा किया है।

सुप्रीम कोर्ट की दूसरी प्रतिनिधि रामाचंद्रन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को प्रदर्शनकारी महिलाओं को पढ़कर सुनाने के बाद कहाः हम कोई न कोई समाधान निकाल लेंगे, जो न केवल भारत के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल साबित होगा।

उन्होंने आगे कहाः हम यहां आप लोगों की बात सुनने आए हैं। हम आपसे यह कहना चाहते हैं कि चाहे जो भी हो प्रदर्शन के आपके अधिकार की हिफ़ाज़त होनी चाहिए। हालांकि हम यहां इसलिए आए हैं कि किसी एक व्यक्ति के प्रदर्शन के अधिकार से दूसरे व्यक्ति के आने-जाने का अधिकार में बाधा नहीं पड़नी चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने उनकी इस बात का विरोध किया और कहा कि स्कूल बसों और एम्बुलैंसों को वहां से गुज़रने दिया जा रहा है, लेकिन उनके मूल अधिकार और उनका प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण है। msm