भारतः मज़दूरों की पीड़ा का समाधान करने के बजाए आंकड़ों से खिलवाड़
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भारत में लाक डाउन के चलते देश भर में बुरी तरह फंस जाने वाले मज़दूरों का संकट कोरोना संकट से बड़ा और बहुमुखी दिखाई देने लगा है इस बीच सरकारी संस्थाओं की ओर से अलग अलग आंकड़े देने और आंकड़ों में उलटफेर करने की कोशिश दुखद है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jun ०५, २०२० ०४:५७ Asia/Kolkata
  • भारतः मज़दूरों की पीड़ा का समाधान करने के बजाए आंकड़ों से खिलवाड़

भारत में लाक डाउन के चलते देश भर में बुरी तरह फंस जाने वाले मज़दूरों का संकट कोरोना संकट से बड़ा और बहुमुखी दिखाई देने लगा है इस बीच सरकारी संस्थाओं की ओर से अलग अलग आंकड़े देने और आंकड़ों में उलटफेर करने की कोशिश दुखद है।

द हिंदू में छपी ख़बर के अनुसार चीफ़ लेबर कमिश्नर कार्यालय ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत में लाक डाउन की वजह से अलग अलग जगहों पर फंसे मज़दूरों की कुल संख्या 26 लाख है जिनमें 10 प्रतिशत मज़दूर एसे हैं जिन्हें शेल्टर में जगह मिल पायी है।

इससे पहले केन्द्र तथा राज्य सरकारों और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित वरिष्ठ अधकारियों ने यह अनुमान पेश किया था कि देश भर में लाक डाउन के कारण फंस जाने वाले मज़दूरों की संख्या 8 करोड़ है। यह आंकड़े आत्म निर्भर पैकेज में अतिरिक्त राशन प्रावधान के लिए प्रयोग किए गए थे।

केन्द्र सरकार की ओर से यह दावा भी किया गया कि मज़दूरों की वापसी के लिए उपलब्ध कराई गई ट्रेनों और बसों से 91 लाख प्रवासी मज़दूर अपने घर पहुंच चुके हैं जबकि आरटीआई एक्टिविस्ट वैंकटेश नायक को सीएलसी से मिलने वाली जानकारी के अनुसार पूरे देश में अलग अलग जगहों पर फंस जाने वाले मज़दूरों की कुल संख्या 26 लाख 17 हज़ार 218 है।

नायक का कहना है कि किसी भी समस्या के समाधान का पहला क़दम यह होता है कि सही जानकारियां एकत्रित की जाएं।

नायक ने सरकारी संस्थाओं की ओर से आंकड़ों में की जाने वाली हेरफेर का एक और उदाहरण देते हुए कहा कि चीफ़ लेबर कमिश्नर कार्यालय से दी जाने वाली जानकारी के अनुसार कर्नाटक में फंस जाने वाले प्रवासी मज़दूरों की संख्या 88 हज़ार 852 है जबकि राज्य सरकार ने हाई कोर्ट को बताया है कि राज्य में 11 लाख प्रवासी मज़दूर फंसे हुए हैं।

इसका मतलब यह है कि ज़रूरत के समय सही आंकड़े तैयार करने वाली संस्थाओं का ढांचा ठीक नही है और इसमें सुधार की ज़रूरत है।