किसानों और सरकार के बीच वार्ता विफल, बैठक छोड़कर मंत्री जी भागे...
भारत में तीन नए कृषि क़ानून के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे किसानों और सरकार के बीच 11वें दौर की वार्ता की विफल हो गयी।
बैठक के दौरान कृषि मंत्री ने कहा कि नए कृषि क़ानूनों में कोई कमी नहीं है। कानूनों को 18 महीने तक टालने के अलावा इससे बेहतर हम और कुछ नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमने अपनी तरफ से बेहतर प्रस्ताव दिया था, अगर किसानों के पास इससे अच्छा कोई प्रस्ताव है तो उसे लेकर आएं। अगली बैठक की तारीख़ फ़िलहाल तय नहीं की गई है जबकि किसान नेता तीनों कानूनों को रद्द करने और एमएसपी पर क़ानून बनाने की मांग पर अड़े रहे।
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार की तरफ से कहा गया कि डेढ़ साल की जगह 2 साल तक कृषि क़ानूनों को स्थगित करके चर्चा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि अगली बैठक केवल तभी हो सकती है जब किसान यूनियनें सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए तैयार हों, कोई अन्य प्रस्ताव सरकार ने नहीं दिया। राकेश टिकैत ने कहा कि योजना के अनुसार, ट्रैक्टर रैली 26 जनवरी को होगी।
बीकेयू क्रांतिकारी के राज्य अध्यक्ष सुरजीत सिंह फूल ने कहा कि सरकार द्वारा जो प्रस्ताव दिया गया था वो हमने स्वीकार नहीं किया। कृषि कानूनों को वापस लेने की बात सरकार ने स्वीकार नहीं की। अगली बैठक के लिए अभी कोई तारीख तय नहीं हुई है।
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार कक्का ने कहा कि लंच ब्रेक से पहले, किसान नेताओं ने कृषि कानूनों को रद्द करने की अपनी मांग दोहराई और सरकार ने कहा कि वे संशोधन के लिए तैयार हैं। मंत्री ने हमें सरकार के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए कहा और हमने उसे हमारी मांग पर विचार करने के लिए कहा। उसके बाद मंत्री बैठक छोड़कर चले गए।
ज्ञात रहे कि नए कृषि क़नूनों के ख़िलाफ़ में दिल्ली की सीमाओं पर लगातार 58वें दिन भी किसानों का प्रदर्शन जारी है।
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