किसानों का इरादा मज़बूत, लंबी लड़ाई लड़ने का दिखाया दमख़म
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कसान आंदोलन जारी है और तीनों कृषि क़ानून को वापस कराने पर किसान डटे हुए हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jun ०६, २०२१ ०९:१५ Asia/Kolkata
  • (एएनआई और जनसत्ता के सौजन्य से)
    (एएनआई और जनसत्ता के सौजन्य से)

कसान आंदोलन जारी है और तीनों कृषि क़ानून को वापस कराने पर किसान डटे हुए हैं।

किसान नेता राकेश टिकैत ने साफ़ कह दिया है कि जब तक ये क़ानून वापस नहीं लिए जाते उस वक़्त तक आंदोलन जारी रहेगा, चाहे 2024 तक आंदोलन क्यों न करना पड़े। उन्होंने कहा कि ये क़ानून वापस लिए जाएंगे, यह निश्चित है।

राकेश टिकैत और उनके साथी किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ौनी शनिवार को हरियाणा के फ़तेहाबाद ज़िले के टोहाना सदर पुलिस थाने पहुंचे थे। वहाँ उन्होंने अपने दो किसान साथियों को रिहा करने की मांग की जिन्हें जाजपा विधायक देवेन्द्र बबली के आवास का घेराव करने के इल्ज़ाम में गिरफ़्तार किया गया है।

टोहाना सदर पुलिस थाने पर राकेश टिकैत ने जजपा विधायक देवेन्द्र बबली पर कथित दुर्व्यवहार का इल्ज़ाम लगाते हुए उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने की मांग की।

राकेश टिकैत और चढ़ूनी अन्य किसानों के साथ सबसे पहले वहाँ की अनाज मंडी में इकट्ठा हुए और वहाँ से गिरफ़्तारी देने के लिए पुलिस थाने तक मार्च किया, जिसके मद्देनज़र भारी तादाद में पुलिस बल की तैनाती की गयी थी।

ग़ौरतलब है कि 1 जून को जननायक जनता पार्टी जजपा के विधायक के ख़िलाफ़ किसानों के एक गुट ने प्रदर्शन किया था और उनके ख़िलाफ़ नारेबाज़ी करने के साथ साथ काले झंडे भी दिखाए थे।

शनिवार को टोहाना पुलिस थाने के सामने प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कहा कि उन्होंने पुलिस से कहा कि या तो उनके साथियों को छोड़ दिया जाए फिर उन्हें भी जेल में डाल दिया जाए।

इससे पहले अनाज मंडी में जुटी भीड़ को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि उनका प्रदर्शन उस वक़्त तक जारी रहेगा, जबतक तीनों कृषि क़ानून वापस नहीं हो जाते और कृषि की पैदावार के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी की गारंटी वाला क़ानून लागू नहीं हो जाता।

राकेश टिकैत ने कहा कि भारत सरकार को इन काले क़ानूनों को वापस लेना ही जोगा, चाहे वह वर्ष 2022 में ले या 2023 में। वर्ष 2024 में ये क़ानून वापस हो जाएंगे, यह निश्चित है। टिकैत ने ज़ोर देकर कहा कि किसानों का आंदोलन 2024 तक जारी रहेगा। (MAQ/N)

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