पूरे ईरान में शोक!!!
पैग़म्बरे इस्लाम के नवें उत्तराधिकारी इमाम मोहम्मद तक़ी अलैहिस सलाम के शहादत दिवस पर ईरान में शोक मनाया जा रहा है। ईरान में शहरों, क़स्बों और गावों में इमामबाड़ों और सड़कों पर जगह जगह काली पट्टियां लगाकर और कोविड-19 को प्रोटोकॉल के तहत इमाम मोहम्मद तक़ी अलैहिस्सलाम की शहादत मनायी जा रही है।
30 ज़ीक़ादा सन 1442 हिजरी क़मरी बराबर 11 जुलाई 2021 को पैग़म्बरे इस्लाम के नवें उत्तराधिकारी इमाम मोहम्मद तक़ी अलैहिस सलाम के शहादत दिवस पर ईरान में शोक मनाया जा रहा है।
सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई कहते हैः हमारे एक इमाम को 25 साल की उम्र में क्यों शहीद कर दिया गया? उस वक़्त की ज़ालिम सरकार, पैग़म्बर के अहले बैत की इस महान हस्ती को इससे ज़्यादा सहन करने पर क्यों तैयार नहीं हुई? हमें इस सवाल का जवाब इमाम मुहम्मद तक़ी अलैहिस्सलाम के जीवन और व्यक्तित्व से मिलता है। वे असत्य के ख़िलाफ़ लड़ाई का आईना थे, वे ख़ुदाई शासन स्थापित करने का न्योता देने वाले थे, वे अल्लाह और क़ुरआने मजीद के लिए लड़ते रहते थे, वे सांसारिक ताक़तों से कभी नहीं डरते थे।
सुप्रीम लीडर आगे कहते हैः इमाम मुहम्मद तक़ी अलैहिस्सलाम की ज़िंदगी, आदर्श है। उनके व्यक्तित्व में अपार महानताएं थीं, मगर वे 25 साल की उम्र में इस दुनिया से चले गए। यह हम नहीं कहते, ग़ैर शिया इतिहासकारों ने भी लिखा है कि यह महान हस्ती अपने बचपन और जवानी में ही (उस वक़्त के ख़लीफ़ा) मामून और दुनिया की नज़र में ख़ास दर्जा हासिल कर चुकी थी। ये बड़ी अहम चीज़ें हैं। यह हमारे लिए आदर्श है।
आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई इमाम मोहम्मद तक़ी अलैहिस सलाम के बारे में कहते हैः
ख़ुदा के इस नेक बंदे की छोटी सी ज़िंदगी कुफ़्र व अत्याचार से लड़ते हुए गुज़र गई। जवानी के दिनों में वे इमामत के पद पर आसीन हुए। बहुत कम समय में उन्होंने ख़ुदा के दुश्मनों से प्रभावी जेहाद किया। वे अभी सिर्फ़ 25 साल के थे कि ख़ुदा के दुश्मनों को यक़ीन हो गया कि वे उनके अस्तित्व को अब और बर्दाश्त नहीं कर सकते, इस लिए उन्हें ज़हर देकर शहीद कर दिया गया। हमारे सभी इमामों ने अपने जेहाद से इस्लाम की गौरवपूर्ण तारीख़ का एक नया अध्याय लिखा। इमाम मुहम्मद तक़ी अलैहिस्सलाम ने इस्लाम के व्यापक जेहाद के एक अहम पहलू को व्यवहारिक बनाया और हमें पाठ दिया। वह पाठ यह है कि जब मुनाफ़िक (मिथ्याचारी) व दिखावा करने वाली ताक़तें सामने हों तो हमें चाहिए कि उन ताक़तों का मुक़ाबला करने के लिए लोगों में समझ-बूझ और दूरदर्शिता बढ़ाएं। अगर दुश्मन खुल कर दुश्मनी कर रहा है, दिखावा नहीं कर रहा है तो उससे मुक़ाबला आसान होता है लेकिन जब मामून जैसा शख़्स, दुश्मनी पर तुला हुआ हो जो इस्लाम की मदद और अपनी पवित्रता का दावेदार हो तो जनता के लिए उसकी हक़ीक़त को समझ पाना मुश्किल हो जाता है।
हज़रत इमाम मोहम्मद तक़ी अलैहिस सलाम पवित्र रमज़ान के महीने में 195 हिजरी क़मरी को पैदा हुए और अपने पिता हज़रत इमाम रज़ा अलैहिस सलाम की शहादत के बाद, जनता के मार्गदर्शन का ईश्वरीय दायित्य संभाला जिसे इमामत कहते हैं। हज़रत इमाम मोहम्मद तक़ी अलैहिस सलाम का जीवन काल इस्लामी सभ्यता के फलने फूलने का दौर था। विभिन्न मतों के विद्वानों से डिबेट करना, लोगों ख़ास तौर पर बुद्धिजीवियों को शिक्षा व प्रशिक्षा देना और तत्कालीन शासक की जनविरोधी नीतियों का पर्दाफ़ाश करना, हज़रत इमाम मोहम्मद तक़ी अलैहिस सलाम की वैज्ञानिक, सास्कृतिक व राजनैतिक गतिविधियां थीं।
हज़रत इमाम मोहम्मद तक़ी अलैहिस सलाम को तत्कालीन अब्बासी शासक मोतसिम ने 30 ज़ीक़ादा सन 220 हिजरी क़मरी को ज़हर दिलवा कर शहीद करा दिया। (MAQ/N)
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