ईरानी खिलाड़ियों ने असंभव कामों को संभव बनाया हैः वरिष्ठ नेता
ओलंपिक तथा पैराओलंपिक खेलों में भाग लेने वाले ईरानी खिलाड़ियों ने शनिवार को इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता से तेहरान में भेंट की।
इस मुलाक़ात में ईरान के गौरान्वित ओलंपिक और पैराओलंपिक खिलाड़ियों के प्रयासों की सराहना करते हुए आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर देश के इन गौरान्वित खिलाड़ियों का महत्वपूर्ण संदेश, देखने में असंभव लगने वाले कामों को संभव बनाना और युवाओं को धीरज तथा आशा का पैग़ाम देना है।
इस भेंट में वरिष्ठ नेता ने खेलों में डोपिंग के माध्यम से मैडेल हासिल करने वाले कुछ उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि बेईमानी, रिश्वत, राजनीतिक हथकण्डों और डोपिंग के माध्यम से पदक हासिल करना ग़लत काम है।
आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने विजय के साथ ही खेल के मैदान में मानवीय, धार्मिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों के ज़ाहिर होने को बहुत ही महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ओलंपिक खेलों में ईरान की महिला खिलाड़ियों ने यह सिद्ध कर दिया कि हेजाब, खेल के मैदान में चमकने में बाधा नहीं है। आपने कहा कि देश की महिलाओं ने इसी बात को राजनीति, प्रबंधन और अन्य क्षेत्रों में भी साबित किया है।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने बताया कि ईरानी महिला खिलाड़ियों के हेजाब ने इस्लामी देशों की महिलाओं के लिए भी मार्ग प्रशस्त कर दिया। इसका नतीजा यह निकला कि अब 10 से अधिक इस्लामी देशों की महिला खिलाड़ी, हेजाब के साथ खेलों में हिस्सा ले रही हैं।
वरिष्ठ नेता ने खेल के मैदानों में अवैध ज़ायोनी शासन को मान्यता दिये जाने के विषय को बहुत ही अहम बताया। उन्होंने कहा कि क्रूर, जातिवादी और जनसंहारक अवैध ज़ायोनी शासन चाहता है कि अन्तर्राष्ट्रीय खेल के मैदानों में उपस्थित होकर अपने लिए वैधता को हासिल करे। इस बारे में वर्चस्ववादी उसकी सहायता करते हैं।
वरिष्ठ नेता का कहना था कि सम्मानीय खेल अधिकारियों, और खिलाड़ियों को इस संबन्ध में बिल्कुल भी निष्क्रिय नहीं होना चाहिए।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने खिलाड़ियों को वंचित करने के उद्देश्य से ज़ायोनी शासन और उसके समर्थकों की कार्यवाहियों की ओर संकेत करते हुए कहा कि खेल मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और क़ानूनी संस्थाओं को चाहिए कि वे इस मुद्दे को क़ानूनी मार्ग से आगे बढ़ाएं। उन्हें अन्य मुस्लिम देशों के खिलाड़ियों का समर्थन करना चाहिए।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि ईरान के गौरान्वित खिलाड़ी एक मैडेल के लिए ज़ायोनी शासन के प्रतिनिधि से हाथ नहीं मिला सकते।
उन्होंने कहा कि यह नई बात नहीं है बल्कि विगत में भी एसा हो चुका है। विगत में दक्षिणी अफ्रीका की अपारथाइड व्यवस्था के प्रतिनिधियों से भी खिलाड़ियों ने मिलने से इन्कार किया था। बाद में इस व्यवस्था का अंत हो गया और अवैध ज़ायोनी शासन का भी अंत हो जाएगा।
हमारा व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए क्लिक कीजिए
हमारा टेलीग्राम चैनल ज्वाइन कीजिए