या रसूलल्लाह के नारों के साथ शुरू हुआ विलायत सैन्य अभ्यास
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ईरान के आसमानों की रक्षा करने वाले रक्षकों ने विलायत-1400 नामक संयुक्त विशेष सैन्य अभ्यास का आरंभ या रसूलल्लाह के नारे साथ आरंभ किया है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Oct १२, २०२१ ०९:४३ Asia/Kolkata
  • या रसूलल्लाह के नारों के साथ शुरू हुआ विलायत सैन्य अभ्यास

ईरान के आसमानों की रक्षा करने वाले रक्षकों ने विलायत-1400 नामक संयुक्त विशेष सैन्य अभ्यास का आरंभ या रसूलल्लाह के नारे साथ आरंभ किया है।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, मंगलवार को ईरान की सेना ने विलायत-1400 संयुक्त सैन्य अभ्यास का आरंभ किया है। इस सैन्य अभ्यास की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही है कि यह या रसूलल्लाह के कोड वर्ड से शुरू हुआ है। ईरान की वायु सेना द्वारा शुरू किए गए इस विशेष संयुक्त सैन्य अभ्यास में स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों की स्थापना, आधुनिक राडार, इन्फॉर्मेशन सिस्टम, इलेक्ट्रानिक युद्ध, संचार प्रणाली और दृश्य निगरानी नेटवर्क रेगिस्तानी क्षेत्र में शुरू हुआ।

ईरान एयर डिफेंस बेस के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल आमिर क़ादिर रहीम ज़ादे।

 

ईरान एयर डिफेंस बेस के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल आमिर क़ादिर रहीम ज़ादे ने सैन्य अभ्यास के आरंभ होने के अवसर पर कहा कि इलाक़े और ईरान के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटने की क्षमता में वृद्धि के संदेश के साथ किया जा रहा है। इन चुनौतियों को देखते हुए, ईरान की रक्षा नीति ख़तरों से उचित रूप में निपटने पर आधारित है। पूर्ण रूप से सुरक्षा व्यवस्था के लिए दो बिंदुओं पर ध्यान दिया जा सकता है। पहला, रक्षा तकनीक को घरेलू स्तर पर बढ़ावा देना और दूसरे, रक्षात्मक क्षमताओं में वृद्धि करना। अमीर क़ादिर रहीम ज़ादे ने कहा कि सैन्य अभ्यास के इस चरण में सेना और आईआरजीसी के संयुक्त मानवयुक्त और मानव रहित ड्रोन विमानों ख़ुफ़िया और सूचना एकत्रित करने वाली उड़ानों का प्रशिक्षण किया।

विलायत-1400 संयुक्त सैन्य अभ्यास।

ग़ौरतलब है कि ईरान की इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैय्यद अली ख़ामेनई ने कुछ समय पहले कहा था कि आज जब दुनिया में अनैतिक एवं अमानवीय साम्राज्यवादी शक्तियों ने अपना वर्चस्व जमा रखा है और दूसरे देशों पर हमला करने और निर्दोष लोगों का जनसंहार करने में उन्हें कोई बुराई नज़र नहीं आती है, रक्षा उद्योग का विकास एक सामान्य बात है। इसलिए कि यह शक्तियां, जब तक किसी देश की शक्ति का लोहा नहीं मानती हैं, उस देश की शांति व स्वाधीनता ख़तरे में पड़ी रहती है। (RZ)

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