राष्ट्रसंघ में ईरानी प्रस्ताव पारित
राष्ट्रसंघ में ईरान का वह प्रस्ताव बहुमत से पारित हो गया जिसमें सुझाव दिया गया है कि NPT के जिन सदस्य देशों के पास परमाणु हथियार हैं वे इन हथियारों को नष्ट करने में पारदर्शिता के साथ अपने दायित्वों व ज़िम्मेदारियों का पालन करें।
परमाणु हथियार अप्रसार संधि NPT के अनुसार परमाणु हथियारों से सम्पन्न देश इस बात के प्रति वचनबद्ध हुए हैं कि वे अपने समस्त परमाणु हथियारों को नष्ट कर देंगे। इसी प्रकार ये देश इस बात के प्रति भी प्रतिबद्ध हुए हैं कि वे न केवल परमाणु हथियारों के निर्माण के संबंध में किसी प्रकार का कोई कदम नहीं उठायेंगे बल्कि ये देश परमाणु हथियारों को न तो दूसरे देशों में स्थानांतरित करेंगे और न ही इन हथियारों के निर्माण के संबंध में दूसरे देशों से सहयोग करेंगे।
परमाणु हथियारों से सम्पन्न देश दशकों बाद एक बार फिर इस बात पर प्रतिबद्ध हुए हैं कि वे इन हथियारों को नष्ट करने के संबंध में प्रभावी क़दम उठायेंगे।
राष्ट्रसंघ की एक समिति में ईरान के जिस प्रस्ताव को पारित किया गया है उसके एक भाग में परमाणु हथियार रहित पश्चिम एशिया की मांग की गयी है। इसी प्रकार इस प्रस्ताव में इस बात की भी मांग की गयी है कि जायोनी शासन परमाणु हथियार अप्रसार संधि NPT का सदस्य बन जाये और अंतरराष्ट्रीय पर्वेक्षकों को अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की जांच की अनुमति दे।
इसी प्रकार इस प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि इस बात की गैरेन्टी दी जाये कि न तो परमाणु हथियारों का प्रयोग किया जायेगा और न ही इनके प्रयोग की धमकी दी जायेगी।
ज्ञात रहे कि अमेरिका, ज़ायोनी शासन, यूरोपीय संघ के सदस्य देश और कुछ पश्चिमी देशों ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया है। लगभग एक महीने बाद इस प्रस्ताव को राष्ट्रसंघ की महासभा में पेश किया जायेगा जहां इसे अंतिम रूप दिया जायेगा।
जानकार हल्कों का मानना है कि अमेरिका, पश्चिमी और यूरोपीय संघ के सदस्य देशों और इसी प्रकार जायोनी शासन ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट देकर अपनी अस्ली मंशा ज़ाहिर कर दी है। रोचक बात यह है कि अमेरिका और पश्चिमी व यूरोपीय देश एक ओर मानवाधिकारों की रक्षा का राग अलापते हैं और दूसरी ओर उन हथियारों को खत्म किये जाने के खिलाफ वोट देते हैं जो पूरी मानवता के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं और वे स्वंय को ज़िम्मेदार देश भी कहते हैं।
इन जानकार हल्कों का मानना है कि अमेरिका कितना बड़ा ज़िम्मेदार देश है इसका परिचय उसने वर्ष 1945 में जापान के दो नगरों हीरोशीमा और नागासाकी पर परमाणु बम मारकर दे दिया है और अभी 20 वर्षों के बाद जिस अपमान के साथ वह अफगानिस्तान से गया है उससे भी अमेरिका की ज़िम्मेदारी की वास्तविकता समझ में आ जाती है। दूसरे शब्दों में आज अफगानिस्तान, इराक, यमन और उत्तर कोरिया सहित विश्व के बहुत से देशों की समस्याओं की जड़ अमेरिका के क्रियाकलापों में निहित है।
नोट यह व्यक्तिगत विचार हैं। पार्सटूडे का इनसे सहमत होना ज़रूरी नहीं है। MM
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