अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर पर भरोसा नहीं किया जा सकताः विदेशमंत्रालय
विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि अमेरिका के परमाणु समझौते में वापसी की शर्त यह है कि वह तेहरान के खिलाफ प्रतिबंधों को प्रभावी तरीक़े से और एक साथ समाप्त करे और उसका सत्यापन भी किया जा सके और अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
सईद ख़तीबज़ादे ने शुक्रवार को एक साक्षात्कार में कहा कि परमाणु समझौते में अमेरिका की वापसी की शर्त यह है कि वह एक साथ और प्रभावी तरीक़े से तेहरान के खिलाफ प्रतिबंधों को समाप्त करे और प्रतिबंधों की समाप्ति सत्यापन योग्य हो और ये सब चीज़ें वियना वार्ता में हमारा उद्देश्य हैं।
उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका इन उद्देश्यों को दृष्टि में रखकर वियना वार्ता में हिस्सा ले तो निश्चित रूप से कम से कम समय में सहमति हो सकती है। विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अलबत्ता हम इस बात की गैरेन्टी चाहते हैं कि अमेरिका दोबारा अंतरराष्ट्रीय कानूनों का मज़ाक़ नहीं उड़ायेगा। साथ ही उन्होंने बल देकर कहा कि अगर अमेरिकी सरकार इस बात की गैरेन्टी नहीं दे सकती कि वह दोबारा अंतरराष्ट्रीय कानूनों का मज़ाक़ नहीं उड़ायेगी और अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर का वह मूल्य व भरोसा नहीं है जैसाकि वह दावा कर रही है अतः स्वाभाविक है कि इस्लामी गणतंत्र ईरान और वार्ता करने वाली टीम गैरेन्टी लेने पर बल दे।
विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने बल देकर कहा कि परमाणु समझौते के उल्लंघन के कारण ईरान को काफी क्षति पहुंची है जिस पर ध्यान दिया जाना चाहिये।
ज्ञात रहे कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आठ मई 2018 को एक पक्षीय रूप से अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते से निकल गये थे जिसके बाद उन्होंने ईरान के खिलाफ अधिकतम दबाव की नीति अपनाई और इस देश के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने चुनाव से पहले वादा किया था कि वह परमाणु समझौते में वापस आ जायेंगे परंतु अमेरिका का राष्ट्रपति बने हुए उन्हें महीनों का बीच चुका है और अभी तक उन्होंने कोई ऐसा कार्य अंजाम नहीं दिया है जो इस बात का सूचक हो कि वह अपने दावे में गम्भीर हैं। MM
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