ईरान के विरुद्ध अमरीका के सारे समीकरण विफल रहे हैंः वरिष्ठ नेता
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने 9 जनवरी 1978 की घटना के अवसर पर रविवार को भाषण दिया जिसमें विभिन्न बिंदुओं की ओर संकेत किया। उन्होंने कुछ एसे मुद्दों का उल्लेख किया जो वर्तमान और भविष्य में विशेष महत्व के स्वामी हैं। वरिष्ठ नेता ने कहा कि ईरान के बारे में अमरीका के समीकरण ग़लत साबित हो रहे हैं।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने ईरान की इस्लामी शासन व्यवस्था को इस्लाम का प्रतीक बताया है। उन्होंने "अमरीका मुर्दाबाद के नारे के संदर्भ में कहा कि अमरीका पूरी तरह से इस्लामी व्यवस्था का दुश्मन है क्योंकि वह इसको वह धर्म से निकला हुआ ईरानी राष्ट्र की आस्था का प्रतीक मानता है।
आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि ईरान के संदर्भ में अमरीका के सारे ही समीकरण ग़लत साबित हुए हैं। थोपे गए युद्ध के बारे में अमरीका का यह सोचना था कि सद्दाम का समर्थन करके वह ईरानी राष्ट्र को घुटने टेकने पर मजबूर कर देगा जो कि ग़लत साबित हुआ।
वरिष्ठ नेता का कहना था कि अमरीकी समीकरण की एक अन्य ग़लती जनरल क़ासिम सुलैमानी की शहादत थी। अमरीका सोच रहा था कि शहीद सुलैमानी को रास्ते से हटाकर प्रतिरोध की प्रक्रिया को सदा के लिए रोक दिया जाएगा लेकिन उसका उल्टा हुआ। यहां भी अमरीकी समीकरण फेल हो गए।
उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों के सुन्नी मुसलमान इस्लामी गणतंत्र ईरान से प्रेम करते हैं जिसको विभिन्न देशों में आयोजित शहीद क़ासिम सुलैमानी की बरसी पर देखा गया। वरिष्ठ नेता के भाषण में बहुत सी उपलब्धियों और वास्तविकताओं की ओर संकेत किया गया जो इस्लामी सभ्यता के निर्माण में प्रभावी रही हैं। उन्होंने शत्रु तथा वर्चस्ववादियों के मुक़ाबले में घुटने न टेकने को क्रांति के मूल उद्देश्यों में से बताया।
इस संदर्भ में वरिष्ठ नेता ने कहा कि अगर एक कालखण्ड के दौरान शत्रु के साथ किसी बारे मेंं बात होती है तो यह उसके सामने नतमस्तक होने के अर्थ में बिल्कुल भी नहीं है। हम आजतक उनके सामने झुके नहीं हैं और आगे भी एसा ही होगा। ईरान मेंं इस्लामी शासन व्यवस्था की स्थापना को अब 43 वर्ष हो रहे हैं। ईरानी राष्ट्र ने इस दौरान बहुत सी मुश्किलों का सामना किया। इस समस्याओं के बावजूद बहुत से अवसरों पर ईरानी राष्ट्र ने विश्व स्तर पर कुछ अभूतपूर्व उपल्बधियां अर्जित की हैं। इन उपलब्धियों के हासिल करने में महत्वपूर्ण बिंदु, सभी वर्चस्ववादी शक्तियों के मुक़ाबले में कड़ा प्रतिरोध और दूरदर्शिता है।
इस हिसाब से इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई के भाषण का सार, शत्रु की पहचान और उसकी शत्रुतापूर्ण चालों के मुक़ाबले में वास्विक संप्रभुता की रक्षा करना है। शत्रु की यह चालें ईरानी राष्ट्र के सामने षडयंत्र सैनिक, कूटनैतिक, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में विभिन्न ढंग से सामने आ सकती हैं जिनके मुक़ाबले का एकमात्र मार्ग कड़ा प्रतिरोध है।
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