आतंकवादियों के फलने-फूलने की मुख्य वजह क्या है?
ईरान में मानवाधिकार आयोग के सचिव काज़िम ग़रीबाबादी ने आतंकवादी गुट MKO और उसके सदस्यों को पश्चिमी व यूरोपीय देशों में शरण देने की आलोचना की है।
काज़िम ग़रीबाबादी ने उन अपराधों की ओर संकेत किया जिसे मिथ्याचारी व आतंकवादी गुट MKO ने ईरान, इराक और सीरिया में अंजाम दिया है।
ईरान की इस्लामी क्रांति के सफल हो जाने के बाद से ही MKO ने ईरानी जनता, धर्मगुरूओं और नेताओं के विरुद्ध आतंकवादी कार्यवाहियां आरंभ कर दी थी और हज़ारों ईरानी लोगों को शहीद कर दिया परंतु आरंभ से ही कुछ यूरोपीय व पश्चिमी देशों में MKO के कार्यालय थे और वे पूरी आज़ादी के साथ इन देशों में रहते थे और आज भी रह रहे हैं।
रोचक बात है कि पश्चिमी व यूरोपीय देश एक ओर स्वंय को आतंकवाद का विरोधी और उससे मुकाबला करने वाला समझते हैं और दूसरी ओर उन्होंने अपने यहां आतंकवादी गुटों व तत्वों को शरण भी दे रखी है। सवाल यह है कि अगर ये देश वास्तव में आतंकवाद के विरोधी हैं तो अपने यहां आतंकवादी गुटों व तत्वों को शरण क्यों देते हैं?
बहुत से जानकार हल्कों का मानना है कि ये देश न तो आतंकवाद के विरोधी थे और न हैं। यही नहीं बहुत से जानकार हल्कों का मानना है कि कुछ पश्चिमी और ग़ैर पश्चिमी देशों ने अपने हितों को साधने के लिए आतंकवादी गुटों व तत्वों को बनाया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बारमबार कहा है कि दाइश को अमेरिका ने बनाया है और यही बात अमेरिका की विदेशमंत्री हिलेरी क्लिंटन ने भी कही है और यह बात उन्होंने अपनी एक किताब में भी लिखी है।
एक वक्त था जब पूर्व सोवियत संघ का मुकाबला करने के लिए अमेरिका ने तालेबान को बनाया और उन्हें हथियारों से लैस किया और उन्हें मुजाहेदीन कहा जाता था पर जब यही तालेबान अमेरिका के विरोधी हो गये तो उन्हें आतंकवादी कहा जाने लगा। यही नहीं कुछ वर्षों के बाद अमेरिका ने कहा कि आतंकवादियों की दो किस्में हैं एक अच्छे आतंकवादी और दूसरे बुरे आतंकवादी।
अमेरिका से पूछा जाना चाहिये कि अच्छे और बुरे आतंकवादी का मापदंड क्या है? इसके जवाब में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना और कहना है कि जो अमेरिकी हितों के अनुसार काम करता है वह अच्छा आतंकवादी है और जो उसकी इच्छा के खिलाफ काम करता है वह बुरा आतंकवादी है।
बहरहाल आज जो पूरी दुनिया से आतंकवादियों का सफाया नहीं हो रहा है वह पश्चिम और यूरोप सहित कुछ देशों के दोहरे मापदंड का नतीजा है और जब तक आतंकवाद से मुकाबले के संबंध में दोहरा मापदंड जारी रहेगा तब तक आतंकवादी गुट फलते- फूलते रहेंगे।
नोटः ये व्यक्तिगत विचार हैं। पार्सटूडे का इनसे सहमत होना ज़रूरी नहीं है। MM