ईरान की धमकी, प्रतिबंधों को राजनैतिक हथकंडा न बनाया जाए
संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरान के स्थाई राजदूत और प्रतिनिधि मजीद तख़्त रवान्ची ने अपने बयान में कहा कि हम कुछ सरकारों की ओर से द्विपक्षीय संबंधों में राजनैतिक हथकंडे के रूप में प्रतिबंधों को थोपे जने की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं।
उनका कहना था कि इस्लामी गणतंत्र ईरान एक पक्षीय कार्यवाही को मानवता प्रेमी सहायताओं को पेश करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों के रास्ते में बड़ी रुकावट और दुनिया में मानवीय संकट पैदा करने का एक साधन समझता है।
ईरान की तरफ़ ओर से कुछ देशों की ओर से एक पक्षीय प्रतिबंध लगाए जाने की निंदा का मामला उस समय साफ़ हो जाता है जब हम अमरीका के नेतृत्व में पश्चिमी देशों के क्रियाकलापों पर नज़र डालें। मूल रूप से एक पक्षीय प्रतिबंध एक हथकंडे के रूप में जाना जाता है जिसे पश्चिमी ब्लाक हमेशा से दूसरे देशों के विरुद्ध एक हथियार और हथकंडे के रूप में प्रयोग करता है।
इस संबंध में यूक्रेन युद्ध के बारे में रूस पर अभूतपूर्व प्रतिबंध लगाए जाने के मुद्दा है जिसकी वजह से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा गयी है बल्कि दुनिया के कुछ क्षेत्रों विशेषकर पश्चिमी एशिया और अफ़्रीक़ा में खाद्य पदार्थ का संकट बढ़ गया है।
रूस पर प्रतिबंध लगाए जाने में आगे आगे अमरीका रहा है जबकि पूरी दुनिया में सबसे ज़्यादा प्रतिबंध लगाने वाला देश भी अमरीका ही है और वह अपनी विदेश नीति के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए अनेक तरह से प्रतिबंधों का सहारा लेता है और दुनिया के विभिन्न देशों को टारगेट करता है। यह प्रतिबंध अमरीका की राजनीति और उसकी कार्यवाहियों का विरोध करने के बहाने तथा अनेक प्रकार के दावों के साथ दुनिया के अनेक देशों के ख़िलाफ़ लगाए जाते हैं।
वाशिंग्टन ने कोरोना महामारी के काल में भी जब दुनिया बहुत ही विषम स्थिति से गुज़र रहा था और देशों को दवाओं और चिकित्सा सुविधाओं की ज़रूरत थी, तो उसे अपने लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए कुछ देशों पर नये प्रतिबंध लगाए या पुराने प्रतिबंधों को और कड़ा कर दिया, अमरीका की इस कार्यवाही ने पूरी दुनिया में मौत का बाज़ार गर्म कर दिया, यही वजह है कि ईरान ने हमेशा से ही इस बात पर बल दिया है कि प्रतिबंधों को कभी भी स्वतंत्र और अमरीका तथा पश्चिमी देशों की नीतियों के विरोधी देशों के ख़िलाफ़ हथकंडे के रूप में प्रयोग न किया जाए। (AK)