न्यूयॉर्क टाइम्स: अमेरिका एक रणनीतिक हार के कगार पर है
पार्सटुडे – न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार ने एक रिपोर्ट में ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध में अमेरिका की अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में असमर्थता का ज़िक्र करते हुए लिखा: "यह युद्ध न केवल अमेरिका को एक रणनीतिक हार के कगार पर ला खड़ा किया है बल्कि इसने उसके सहयोगियों का विश्वास भी बुरी तरह हिला दिया है।"
पार्सटुडे की रिपोर्ट के अनुसार न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है:
"पश्चिमी अधिकारियों और विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी सहयोगियों के दृष्टिकोण से ईरान के साथ युद्ध जाहिर तौर पर एक रणनीतिक हार की ओर बढ़ रहा है।"
इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है:
"अमेरिकी सहयोगी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि ईरान में स्थायी बदलाव लाने के लिए सैन्य बल का उपयोग करने में संयुक्त राज्य अमेरिका की असमर्थता ने ऐसी कमज़ोरियाँ उजागर कर दी हैं जिनका फ़ायदा रूस और चीन उठाएंगे।"
न्यूयॉर्क टाइम्स ने आगे ईरान पर आक्रमण में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लक्ष्यों को हासिल न कर पाने और अमेरिकी सेना की महत्वपूर्ण गोला-बारूद की कमी का ज़िक्र करते हुए लिखा है:
"इस अवधि में ईरान पहले से अधिक दृढ़ हो गया है उसके परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम नष्ट नहीं हुए हैं और होर्मुज़ जलडमरूमध्य व्यवहार में तेहरान के नियंत्रण में आ गया है। इस स्थिति ने संयुक्त राज्य अमेरिका और ज़ायोनी शासन दोनों को एक कमज़ोर स्थिति में डाल दिया है और वे इस संकट के लिए एक-दूसरे को दोषी ठहरा रहे हैं।"
इस रिपोर्ट के एक अन्य भाग में अमेरिकी सैन्य और राजनयिक प्रतिष्ठा में भारी गिरावट का ज़िक्र करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया गया है:
"इस युद्ध में वाशिंगटन के व्यवहार ने इस धारणा को मज़बूत किया है कि अमेरिका वैश्विक अव्यवस्था पैदा करने में एक अप्रत्याशित उपकरण बन गया है। इस स्थिति ने वाशिंगटन के सहयोगियों का विश्वास गंभीर रूप से हिला दिया है और उनमें से कई अमेरिका पर निर्भरता कम करने और अपने विदेशी संबंधों में विविधता लाने का प्रयास कर रहे हैं।"
न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी इस रिपोर्ट के अंत में ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिकी आक्रामक युद्ध की तुलना वियतनाम, इराक़ और अफ़गानिस्तान के युद्धों से करते हुए कहा है:
"अमेरिका एक बार फिर एक लंबी, थकाऊ जंग में हारने वाला पक्ष हो सकता है।" mm