ईरान और अफ़ग़ानिस्तान के संबंधों में नया मोड़...आडियो
तालेबान के अधिकारियों ने ईरान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए एक नया पारगमन मार्ग या ट्रांज़िट रास्ता बनाने की घोषणा की।
तालेबान के उद्योग और व्यापार विभाग के प्रमुख मौलवी फ़ाज़िल मुहम्मद फ़ज़ली के अनुसार, नीमरोज़ में सिल्क ब्रिज रोड के बग़ल में एक नई सड़क के निर्माण से ईरान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच व्यापार में तेज़ी आएगी।
ईरान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच व्यापार सहयोग के विकास के लिए संचार के कई तरीक़े हैं, सिल्क ब्रिज के अलावा, हम हेरात-ख़वाफ़ रेलवे लाइन का उल्लेख भी कर सकते हैं, जिसे चार लाइनों व भागों में परिभाषित किया गया है। ईरानी सरकार ने इस रेलवे लाइन के तीन खंड बनाए हैं जबकि चौथा हिस्सा अफ़ग़ानिस्तान के अंदर है जिसका निर्माण कार्य रुका हुआ बताया जा रहा है।
हालांकि अफ़ग़ानिस्तान में हालिया राजनीतिक परिवर्तन के बाद इस देश और ईरान के बीच व्यापार विनिमय में 20 प्रतिशत की कमी आई है, लेकिन व्यापार संबंधों को मजबूत करने के लिए तालेबान का दृढ़ संकल्प तीन अरब डॉलर तक संबंधों में सुधार की शुभसूचना देता है। अतीत में यह अनुमान लगाया गया था कि ईरान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच व्यापार की मात्रा बढ़कर 5 बिलियन डॉलर हो जाएगी।
अफ़ग़ान विशेषज्ञ शकीबा हाशमी कहती हैं कि ईरान हमेशा से अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के साथ रहा है और अब यह इस देश के लोगों की ज़रूरतों का सबसे महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता और प्रदाता है। इस बीच, सांस्कृतिक और सुरक्षा दोनों ही सामान्य मुद्दे ईरान और अफ़ग़ानिस्तान को एक साथ ला रहे हैं।
अफगानिस्तान की समुद्र तक पहुंच की कमी को ध्यान में रखते हुए इस देश को अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुंचने के लिए विशेष रूप से चाबहार बंदरगाह के माध्यम से ईरान के परिवहन मार्गों की भी आवश्यकता है।
अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दों के विशेषज्ञ अमीन रेज़ाई निजाद कहते हैं कि तालेबान के इस देश पर नियंत्रण के बाद अफ़ग़ानिस्तान से कई देशों से सैनिकों की वापसी के साथ ही ईरान लगभग एकमात्र ऐसा देश है जो अफ़ग़ानिस्तान के लोगों की मदद करता है, और यह मुद्दा मानवीय सहायता के मामले में पूरी गंभीरता के साथ जारी है।
किसी भी मामले में ईरान की सीमाओं की सुरक्षा ने अफ़ग़ान व्यापारियों को ईरान के साथ संचार मार्गों का विस्तार करके अपनी वस्तुओं के आदान-प्रदान की मात्रा बढ़ाने के लिए सुरक्षा प्रदान की है।
साथ ही, सांस्कृतिक समानता और साझा इतिहास ने ईरान और अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के बीच एक अटूट संबंध पैदा कर दिया है जो राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव से ज़्यादा प्रभावित नहीं होता।
इसका मतलब यह है कि हालिया वर्षों में अफ़ग़ानिस्तान पर विदेशियों के क़ब्ज़े के साथ तेज़ हुए विदेशी हस्तक्षेप के बावजूद ईरान के साथ अफगानिस्तान का घनिष्ठ सहयोग इस देश में स्थापित किसी भी राजनीतिक व्यवस्था के तहत जारी रहेगा। (AK)
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