एकपक्षवाद ने ही दुनिया में आतंकवाद को बढ़ावा दियाः रईसी
ईरान के राष्ट्रपति इब्राहीम रईसी ने कहा है कि प्रतिबंध, आतंकवाद, युद्ध और रक्तपात आदि सबकुछ एकपक्षवाद का नतीजा है।
संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा के 77वें अधिवेशन में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क में मौजूद ईरान के राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र संघ को बड़ी शक्तियों का संघ नहीं बनना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रतिबंध, आतंकवाद, युद्ध और रक्तपात जैसे काम एकपक्षवाद का ही परिणाम हैं। वर्तमान समय में अमरीका, विश्व में जिस एक पक्षवाद का प्रतीक है, उसकी आलोचना संयुक्त राज्य अमरीका की नीतियों का विरोध करने वाले देश करते आए हैं। अपनी इसी नीति के अन्तर्गत अमरीका ने पिछले दो दशकों के दौरान विश्व के कई देशों को युद्ध के हवाले किया और वहां रक्तपात की भूमिका प्रशस्त की। इस बारे में इराक़, सीरिया, यमन और अफ़ग़ानिस्तान जैसे देशों का नाम लिया जा सकता है।
सीरिया की वैध सरकार को गिराने के लिए की जाने वाली हिंसक कार्यवाहियों ने जहां पर इस देश में लाखों युद्ध की बलि चढ गए वहीं पर पश्चिमी एशिया में अस्थिरता पैदा हुई। इसी के साथ दाइश जैसे आतंकवादी गुटों का सीरिया और इराक़ में समर्थन ने पूरे क्षेत्र में आतंकवाद को बढ़ावा दिया जो अब अफ़ग़ानिस्तान पहुंच चुका है। इन्ही बातों की वजह से ईरान के राष्ट्रपति ने राष्ट्रसंघ में कहा कि उन्होंने कहा कि प्रतिबंध, आतंकवाद, युद्ध और रक्तपात एकपक्षवाद का नतीजा है।
डोनाल्ड ट्रम्प ने जब अमरीकी सत्ता पर क़ब्ज़ा किया उसके साथ ही उन्होंने पूरी शक्ति के साथ एक पक्षवाद को पूरी दुनिया में फैलाया। ट्रम्प ने न केवल चीन जैसे अमरीकी प्रतिस्पर्धी के मुक़ाबले में इसको विस्तार दिया बल्कि अमरीका के पश्चिमी प्रतिस्पर्धियों को ही नहीं बख़्शा। खेद की बात तो यह है कि जो बाइडेन प्रशासन भी इस समय एक पक्षवाद के संदर्भ में अपने पूर्ववर्ती ट्रम्प की ही नीतियों का अनुसरण कर रहा है। इसको स्पष्ट रूप में इस समय यूक्रेन युद्ध में रूस के विरुद्ध की जाने वाली कार्यवाहियों में देखा जा सकता है।
अमरीका के एकपक्षवाद के एक अन्य रूप को उसके ग़ैर क़ानूनी प्रतिबंधों के रूप में भी देखा जा सकता है। अपने राजनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अमरीका, विश्व के देशों के विरुद्ध प्रतिबंधों को एक हथकण्डे के रूप में प्रयोग कर रहा है। हांलाकि अमरीका की ओर से राजनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक, सुरक्षा या फिर क़ानून का हवाला देकर ग़ैर क़ानूनी प्रतिबंध लगाए जाते हैं किंतु वास्तविकता यह है कि इनको अमरीकी हितों को साधने की आड़ में लगाया जाता है।
इस बारे में ईरान के राष्ट्रपति इब्राहीम रईसी कहते हैं कि राष्ट्रों पर दबाव डालने के उद्देश्य से बड़ी शक्तियां, प्रतिबंधों को हथकण्डे के रूप में प्रयोग करती हैं जिससे देशों को नुक़सान पहुंचता है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध, बड़ी शक्तियों का हथियार बन गया है और इससे विश्व शांति को ख़तरा है। इसलिए इस तरह के मुद्दों पर महासभा के वार्षिक अधिवेशन में बात होनी चाहिए।
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