शत्रुता से मुक़ाबले का एकमात्र मार्ग है प्रतिरोधः वरिष्ठ नेता
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इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने हालिया उपद्रव को शत्रु की एसी चाल बताया जो ईरानी राष्ट्र की महान प्रगति के मुक़ाबले में बहुत ही बचकाना और हताशा से भरी है। वरिष्ठ नेता ने कहा कि प्रतिरोध ही शत्रुता से मुक़ाबले का मार्ग है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Oct १२, २०२२ १३:३९ Asia/Kolkata
  • शत्रुता से मुक़ाबले का एकमात्र मार्ग है प्रतिरोधः वरिष्ठ नेता

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने हालिया उपद्रव को शत्रु की एसी चाल बताया जो ईरानी राष्ट्र की महान प्रगति के मुक़ाबले में बहुत ही बचकाना और हताशा से भरी है। वरिष्ठ नेता ने कहा कि प्रतिरोध ही शत्रुता से मुक़ाबले का मार्ग है।

आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने बुधवार को वरिष्ठ नेता के चयन करने वाली "एक्सपीडिएंसी डिसर्नमेंट कांंउसिल" के प्रमुख और उसके सदस्यों के साथ भेंट की।

इस भेंट में उन्होंने कहा कि हालिया घटनाओं में सबके लिए, यहां तक कि निषपक्ष विदेशी समीक्षकों के लिए भी इनमें शत्रुओं का हस्तक्षेप, पूरी तरह से स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा, आंतरिक भावनाओं से अस्तित्व में आने वाला मुद्दा नहीं है बल्कि लोगों को प्रभावित करने, उनको उकसाने, यहां तक कि आग लगाने वाली सामग्री के प्रशिक्षण जैसे कामों से अब पूरी तरह से स्पष्ट हो चुका है कि यह क्या है?

वरिष्ठ नेता ने हालिया घटनाओं में शत्रु की प्रतिक्रिया को महत्वपूर्ण बिंदु बताते हुए कहा कि ईरानी राष्ट्र ने बहुत ही कम समय के भीतर महान क़दम उठाए जो विश्व वर्चस्ववादियों की नीतियों के मुक़ाबले में 180 डिग्री विपरीत थे, एसे में वे प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर हुए।  इसके लिए उन्होंने योजनाबद्ध ढंग से पैसे ख़र्च करके अमरीका और यूरोप सहित अन्य क्षेत्रों के कुछ नेताओं को मैदान में उतारा।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता कहते हैं कि ईरानी राष्ट्र के महान आन्दोलन ने यह दर्शा दिया कि वह धार्मिक मूल्यों के प्रति कटिबद्ध है और देश, पूरी शक्ति एवं क्षमता के साथ आगे की ओर बढ़ता रहेगा।  आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने अरबईन की रैली में लाखों युवाओं की उपस्थति और उनके व्यवहार को धार्मिक आस्था का गौरव बताया।  उन्होंने कहा कि वास्तव में पहल तो ईरानी राष्ट्र के हाथों हुई इसलिए शत्रु, उपद्रव के रूप में प्रतिक्रिया के लिए विवश हुआ जो बहुत ही बचकानी और मूर्खतापूर्ण थी।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि जबतक ईरानी राष्ट्र के हाथों में इस्लाम का ध्वज रहेगा और वह इस्लामी व्यवस्था के साथ जुड़ा होगा उस समय तक विभिन्न रूपों में उसके विरुद्ध शत्रुता बाक़ी रहेगी, जिसका एकमात्र मार्ग प्रतिरोध है।  उन्होंने कहा कि हमको ईश्वर के निश्चित विजय के वादे पर पूरा भरोसा है और निश्चित रूप में हमें ईश्वर की सहायता मिलेगी।

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