दैय माह का विरोध, विद्रोह जैसा या विद्रोह?
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पार्स टुडे - इस्लामी क्रांति के नेता आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने 12 और 28 बहमन के दो भाषणों में क्रमिक व्याख्या करते हुए ईरान में दैय माह की घटनाओं को तख्तापलट बताया।
(last modified 2026-02-18T12:39:04+00:00 )
Feb १८, २०२६ १८:०६ Asia/Kolkata
  • इमाम ख़ामेनेई का पूर्वी आज़रबाइजान के लोगों के साथ संबोधन
    इमाम ख़ामेनेई का पूर्वी आज़रबाइजान के लोगों के साथ संबोधन

पार्स टुडे - इस्लामी क्रांति के नेता आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने 12 और 28 बहमन के दो भाषणों में क्रमिक व्याख्या करते हुए ईरान में दैय माह की घटनाओं को तख्तापलट बताया।

पार्स टुडे की रिपोर्ट के अनुसार इस्लामी क्रांति के नेता इमाम ख़ामेनेई ने 12 बहमन और 28 बहमन के दो भाषणों में एक क्रमिक और व्याख्यात्मक प्रक्रिया के तहत दिसंबर माह की घटनाओं को पहले 'फितना' और 'तख्तापलट जैसी' अभिव्यक्तियों के साथ वर्णित किया और फिर इसे 'तख्तापलट' करार दिया। अभिव्यक्ति के स्तर में यह परिवर्तन, विश्लेषण के सिद्धांत में बदलाव के अर्थ में नहीं था बल्कि इस बड़े फितने के आयामों की क्रमिक पूर्णता और व्यवस्था की संरचना को भंग करने के लिए एक संगठित योजना के ढांचे में इस घटना की प्रकृति के स्पष्ट होने के अर्थ में था। उनके वक्तव्यों के समूह के आधार पर इस विश्लेषण को कई तार्किक अक्षों में समझाया जा सकता है:

 

1. शासन केंद्रों को निशाना बनाना, तख्तापलट की क्लासिक विशेषता

तख्तापलट के सबसे महत्वपूर्ण संकेतों में से एक, सत्ता और शासन के प्रमुख केंद्रों पर सीधा हमला है। इस्लामी गणतंत्र के नेता ने 12 बहमन के भाषण में इस विशेषता की ओर इशारा करते हुए स्पष्ट किया: "विनाश का लक्ष्य, देश के प्रशासन में संवेदनशील और प्रभावी केंद्र थे। पुलिस पर हमला किया, सिपाह के केंद्रों पर हमला किया, कुछ सरकारी केंद्रों पर हमला किया, बैंकों पर हमला किया।" उन्होंने यह भी कहा कि ये हमले केवल भौतिक नहीं थे बल्कि "मस्जिदों पर हमला किया, क़ुरान पर हमला किया; यह आध्यात्मिक दृष्टि से भी था।"

 

यह वर्णन दर्शाता है कि लक्ष्य केवल विरोध या असंतोष व्यक्त करना नहीं था, बल्कि देश के प्रशासन के मुख्य स्तंभों को कमजोर करने पर केंद्रित था। दूसरे भाषण में भी यह लक्ष्य अधिक स्पष्टता के साथ समझाया गया: "लक्ष्य यह था कि व्यवस्था की नींव को कमजोर करें, अस्थिर करें, संवेदनशील केंद्रों पर कब्जा करें, आईआरबी पर कब्जा करें।" राजनीतिक विश्लेषण के दृष्टिकोण से लक्ष्य निर्धारण का यह स्तर तख्तापलट के पैटर्न से मेल खाता है क्योंकि तख्तापलट मूल रूप से शासन संरचना को बदलने या कमजोर करने के लिए सत्ता के प्रमुख केंद्रों पर नियंत्रण करने का प्रयास है।

 

2. बाहरी डिज़ाइन और मार्गदर्शन; तख्तापलट की प्रकृति में निर्धारक तत्व

इमाम ख़ामेनेई ने दोनों भाषणों में इस बात पर जोर दिया कि यह घटना केवल एक आंतरिक और स्वतःस्फूर्त आंदोलन नहीं थी बल्कि इसकी योजना देश से बाहर तैयार की गयी थी। उन्होंने 12 बहमन को स्पष्ट किया: "इस फितने का नक्शा और डिज़ाइन बाहर हुआ था, इसका अंदर से संबंध नहीं था... साज़िश बाहर तैयार की गयी थी। इस षडयंत्र का संचालन बाहर से हो रहा था और आदेश दिए जा रहे थे।"

 

28 बहमन के भाषण में इस विषय को अधिक विवरण के साथ व्यक्त किया गया: "दो देशों अमेरिका और अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन-यानी इस अवैध ज़ायोनी शासन की खुफिया और जासूसी एजेंसियों ने, कुछ अन्य देशों की खुफिया एजेंसियों की मदद से - जिनमें से कुछ देशों को हम पहचानते हैं - समय के साथ हमारे देश में कुछ दुष्ट व्यक्तियों या दुष्टता की पृष्ठभूमि वाले लोगों को ढूंढा, उन्हें ले गए, उन्हें पैसे दिए, हथियार दिए, तोड़फोड़ की ट्रेनिंग दी, सैन्य या सरकारी केंद्रों में घुसने की ट्रेनिंग दी और उन्हें ईरान भेज दिया, एक अवसर के इंतजार में, कि जब भी कोई अवसर मिले, ये लोग अपना काम शुरू कर दें।"

 

यह वर्णन एक संगठित प्रक्रिया के अस्तित्व को दर्शाता है जिसमें बलों की पहचान, प्रशिक्षण, हथियारों से लैस करना और मार्गदर्शन शामिल है, जो तख्तापलट के संचालन के मूल तत्वों में से हैं। तख्तापलट आमतौर पर एक अचानक प्रतिक्रिया नहीं होती, बल्कि पूर्व नियोजन और समर्थन का परिणाम होती है।

 

3. अस्थिरता पैदा करने के लिए संगठित हिंसा का उपयोग

तख्तापलट की एक और महत्वपूर्ण विशेषता, सुरक्षा संकट पैदा करने के लिए हिंसा का उपयोग है। इस्लामी गणतंत्र ईरान के नेता ने 12 बहमन के भाषण में इस मुद्दे की ओर इशारा किया और कहा: "इन प्रशिक्षित सरगनाओं का कर्तव्य था कि वे हत्याएं कराएं, मौतें पैदा करें।"

 

उनके शब्दों में इस कार्रवाई का उद्देश्य हताहतों की संख्या बढ़ाना और संकट को तीव्र करना था ताकि देश की स्थितियों को अस्थिरता की ओर ले जाया जा सके। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि मुख्य लक्ष्य "देश की सुरक्षा को भंग करना" था क्योंकि "जब सुरक्षा नहीं होगी तो कुछ भी नहीं होगा।"

 

दूसरे भाषण में भी इस हिंसा को एक रणनीति के हिस्से के रूप में वर्णित किया गया: "उनकी नीति यह थी कि आंदोलन हिंसक और बेलिहाज हो; जैसे दाइश का आंदोलन।" यह तुलना दर्शाती है कि हिंसा एक आकस्मिक परिणाम नहीं थी, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था के पतन को पैदा करने की एक रणनीति का हिस्सा थी।

 

4. आंतरिक एजेंटों का कार्यकारी उपकरण के रूप में उपयोग

आधुनिक तख्तापलट में आम तरीकों में से एक बाहर से तैयार किए गए कार्यक्रमों को लागू करने के लिए आंतरिक एजेंटों का उपयोग करना है। आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने इस संदर्भ में समझाया कि मुख्य एजेंटों ने प्रयास किया कि "कुछ सीधे-साधे लोगों - चाहे युवा हों या न हों - को प्रभावित करें, उन्हें गुस्सा दिलाएं और उन्हें कठिन मैदानों में प्रवेश करने के लिए मजबूर करें। यह अवसर उन्हें मिल गया; लगभग डेढ़ महीने पहले वे मैदान में आए और इन सीधे-साधे और अनुभवहीन युवाओं को आगे कर दिया।"

 

उन्होंने यह भी जोर दिया कि भाग लेने वाले कुछ व्यक्ति "धोखा खा गए, सीधापन दिखाया, अनुभवहीन थे।" यह दर्शाता है कि उनके विश्लेषण में, सामाजिक आधार मुख्य डिजाइनरों से भिन्न था और डिजाइनरों ने इन व्यक्तियों का उपयोग कार्यकारी उपकरण के रूप में किया।

 

5. 'तख्तापलट जैसा' की अभिव्यक्ति से 'तख्तापलट' तक का सफर

12 बहमन के भाषण में इस्लामी गणतंत्र के नेता ने अधिक विश्लेषणात्मक लहजे में 'तख्तापलट जैसा' अभिव्यक्ति का उपयोग किया और समझाया कि क्यों कुछ लोगों ने इस घटना को तख्तापलट करार दिया है लेकिन 28 बहमन के भाषण में विभिन्न आयामों को सारांशित करते हुए उन्होंने इस विश्लेषण को इस प्रकार व्यक्त किया: "जो हुआ, वह एक 'तख्तापलट' था जो विफल हो गया।"

 

यह अभिव्यक्ति दर्शाती है कि उनके दृष्टिकोण से इस घटना की विशेषताओं का समूह — जिसमें बाहरी डिज़ाइन, शासन केंद्रों को निशाना बनाना, संगठित हिंसा का उपयोग और व्यवस्था को अस्थिर करने का प्रयास शामिल है सभी तख्तापलट की परिभाषा के अनुरूप हैं। इसी कारण से उन्होंने घोषणा की: "यह तख्तापलट ईरान की जनता के पैरों तले कुचल दिया गया।" यह वाक्य, घटना की तख्तापलट प्रकृति पर जोर देने के अलावा, व्यवस्था और समाज की संरचना की प्रतिक्रिया के सामने इसकी विफलता पर भी जोर देता है।

 

परिणामस्वरूप इस विश्लेषण के दृष्टिकोण से दय माह की घटनाओं का वर्णन करने के लिए 'तख्तापलट' शब्द का उपयोग, सुरक्षा, राजनीतिक और संगठनात्मक संकेतकों के एक समूह पर आधारित है जिन्हें उनके वक्तव्यों में चरण-दर-चरण समझाया गया है। MM