हमारे बस की बात नहीं की धारणा बदल गयीः वरिष्ठ नेता
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इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने मंगलवार की शाम को सुप्रीम काउंसिल ‎फ़ॉर कल्चरल रेवोलुशन के सदस्यों से मुलाक़ात में कहा कि देश को कल्चर के मैदान में सही ‎दिशा में ले जाना, इस विभाग की ज़िम्मेदारी है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Dec ०७, २०२२ ०४:४६ Asia/Kolkata
  • हमारे बस की बात नहीं की धारणा बदल गयीः वरिष्ठ नेता

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने मंगलवार की शाम को सुप्रीम काउंसिल ‎फ़ॉर कल्चरल रेवोलुशन के सदस्यों से मुलाक़ात में कहा कि देश को कल्चर के मैदान में सही ‎दिशा में ले जाना, इस विभाग की ज़िम्मेदारी है।

उन्होंने देश के कल्चरल ढांचे के क्रांतिकारी ‎पुनरनिर्माण को ज़रूरी बताया और कहा कि सुप्रीम काउंसिल फ़ॉर कल्चरल रेवोलुशन को चाहिए कि ‎अलग अलग मैदानों में ग़लत कल्चरल बिन्दुओं और कमियों की सही पहचान और निगरानी के साथ ‎सही बिन्दुओं व नज़रियों को फैलाने के लिए बौद्धिक हल पेश करे। ‎इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर ने अपने संबोधन में 'हमारे बस की बात नहीं' के कल्चर का ज़िक्र ‎किया और इसे इस्लामी क्रांति से पहले समाज में प्रचलित ग़लत सोच क़रार देते हुए कहा कि ‎इस्लामी क्रांति ने कन्सट्रक्टिव क़दम और क्रिएटिव कोशिशों से इस मानसिकता को बदल दिया ‎जिसका नतीजा यह हुआ कि देश में स्थानीय नौजवान माहिरों के हाथों बुहत से बांध, बिजली घर, ‎हाइवे, तेल और गैस इंडस्ट्रीज़ की अनेक तरह की मशीनें और उपकरण बन कर तैयार हुए। ‎

उन्होंने पश्चिम के प्रति दीवानगी के कल्चर और अंग्रेज़ी भाषा के शब्दों के इस्तेमाल को भी समाज में प्रचलित ‎ग़लत कल्चरल रुझान क़रार दिया और कहा कि इस्लामी क्रांति के आने के बाद यह रुझान बदला ‎और पश्चिम की आलोचना का कल्चर आम हुआ।

आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने आम तौर पर ग़ैर महसूस तरीक़े से आने वाले कल्चरल बदलाव पर ‎लगातार नज़र रखने और सही वक़्त पर उसका इलाज किए जाने को देश के कल्चरल ढांचे के ‎क्रांतिकारी पुनर्निर्माण की शर्त क़रार दिया और कहा कि अगर इन तब्दीलियों का निरंतर समझ ‎और उनके निगेटिव असर की रोकथाम में कमज़ोरी हुई या पिछड़ गए तो समाज को ज़रूर नुक़सान ‎पहुंचेगा और इसमें सबसे बड़ा नुक़सान कल्चरल अफ़रातफ़री की शक्ल में सामने आयगा या देश के ‎कल्चरल मामलों की लगाम दूसरों के हाथों में चली जाएगी। ‎

उन्होंने कल्चरल ढांचे में सुधार के लिए सही कल्चरल इंजीनियरिंग को बुनियादी काम क़रार दिया ‎और कहा कि समाज, राजनीति, फ़ैमिली, जीवन शैली और दूसरे मैदानों में कल्चरल कमियों ‎की सही पहचान और हमेशा जागरुक रहने सहित कमियों को दूर करने और सही कल्चरल रुझान को देश की कल्चरल इंजीनियरिंग की अहम शर्तों में गिनवाया।

इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर का कहना था कि वैज्ञानिक विकास के रुझान को फिर से ज़िन्दा ‎करना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने दो दहाई पहले विज्ञान की सरहदों को पार करने की सोच को प्रचलित ‎करने के शानदार नतीजे का ज़िक्र करते हुए कहा कि साइंस और टेक्नॉलोजी के मैदान में लंबी ‎छलांग इस मिशन के अहम नतीजे थे जिसका सिलसिला जारी रहना चाहिए। ‎

उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटियां, साइंटिफ़िक व रिसर्च सेंटर्ज़, संबंधित विभाग, साइंटिफ़िक तरक़्क़ी व ‎छलांग को अपना लक्ष्य क़रार दें ताकि देश विज्ञान व साइंस के कारवां से पीछे न रह जाए। ‎

इस मुलाक़ात के आरंभ में राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी ने अपनी बातचीत में कहा कि सुप्रीम ‎काउंसिल फ़ॉर कल्चरल रेवोलुशन की सबसे अहम ज़िम्मेदारी ज्ञान व कल्चर के मैदानों के मामलों ‎को संभालना है। उन्होंने इस विभाग की ओर से पेश किए गए सुधार के डॉक्यूमेंट को अंतिम शक्ल ‎दिए जाने का उल्लेख किया और कल्चरल ढांचे के क्रांतिकारी पुनर्निर्माण से संबंधित रिपोर्ट पेश की। (AK)

 

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