ईरान ने 8 जनवरी को अमेरिकी अहंकार की हवा कैसे निकाली?
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आज 8 जनवरी है। 8 जनवरी वर्ष 2020 को ईरान की इस्लामी क्रांति संरक्षक बल सिपाहे पासदारान ने इराक में अमेरिका की आधुनिकतम हथियारों से लैस सैनिक छावनी एनुल असद पर 10 से अधिक मिसाइलों से हमला किया था।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jan ०८, २०२३ ११:२६ Asia/Kolkata

आज 8 जनवरी है। 8 जनवरी वर्ष 2020 को ईरान की इस्लामी क्रांति संरक्षक बल सिपाहे पासदारान ने इराक में अमेरिका की आधुनिकतम हथियारों से लैस सैनिक छावनी एनुल असद पर 10 से अधिक मिसाइलों से हमला किया था।

सिपाहे पासदारान के मिसाइली हमले में अमेरिका की सैनिक छावनी एक खंडहर में परिवर्तित हो गयी थी। इस हमले पर पूरी दुनिया में बड़े पर प्रतिक्रिया जताई गयी थी। 3 जनवरी 2020 को अमेरिका के आतंकवादी सैनिकों ने बगदाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बाहर कुछ दूरी पर सिपाहे पासदारान की क़ुद्स ब्रिगेड के कमांडर जनरल कासिम सुलैमानी पर ड्रोन से हमला करके उन्हें और उनके कई साथियों को शहीद कर दिया था जिसके जवाब में ईरान ने 8 जनवरी को अमेरिका की सैनिक छावनी एनुल असद पर मिसाइलों की बारिश कर दी।

हालांकि जनरल कासिम सुलैमानी की शहादत के बाद ही ईरान ने कहा था कि वह इस शहादत का बदला लेगा परंतु ईरान के बयान के जवाब में अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि अगर ईरान ने कोई हमला किया तो ईरान के अंदर 52 ठिकाने हमारे निशाने पर हैं इसके जवाब में ईरान के सैन्य अधिकारियों ने कहा था कि वे ठिकाने हम बतायेंगे। बहरहाल 8 जनवरी की रात को सिपाहे पासदारान ने इराक में अमेरिका की एनुल असद छावनी पर जवाबी हमला किया जिसके कई घंटे के बाद अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टीवी पर आकर बयान दिया और कहा कि ईरान के हमले से कुछ नहीं हुआ, सब कुछ ठीक ठाक है परंतु बाद में पता चला कि अमेरिकी छावनी खंडहर बन चुकी है और दर्जनों अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं जिन्हें उपचार के लिए कुवैत और जर्मनी स्थानांतरित किया गया जबकि ड्रंप ने हमले के पहले दिन कहा था कि ईरानी हमले से कुछ नहीं हुआ।

ईरान ने अमेरिका की सैनिक छावनी पर मिसाइलों की बारिश करके उसके अहंकार की हवा निकाल दी और पूरी दुनिया ने देख लिया कि शेर खुदा के शेर ने अमेरिका की सारी अकड़ बाहर निकाल दी और उसके बाद अमेरिका बिल्कुल चुप हो गया और उसने ईरान के खिलाफ कोई भी सैनिक कार्यवाही न की। सैनिक कार्यवाही तो बहुत दूर की बात उसने ईरान को किसी प्रकार के हमले की धमकी तक नहीं दी। क्योंकि जब आधुनितम हथियारों से लैस अमेरिका की एनुल असद छावनी पर ईरान ने मिसाइल हमला किया था तभी उसकी समझ में आ गया था कि अब ईरान से टकराना यानी अपनी तबाही को दावत देना है।

जो देश अमेरिका और उसके बल पर अकड़ते हैं उन्हें भी अच्छी तरह यह संदेश मिल गया कि अगर ईरान उनके खिलाफ कुछ नहीं करता तो इसका यह मतलब नहीं है कि वह अमेरिका के पिछलग्गू देशों से डरता है। अमेरिकी सेना के तत्कालीन सेन्ट्रल कमांडर जनरल मेकेन्ज़ी ने कहा था कि मैंने इस प्रकार का हमला इससे पहले नहीं देखा था और सिपाहे पासदारान की मिसाइलें अमेरिकी सैनिकों पर गिरीं। MM

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