ब्रिक्स में ईरान की सदस्यता से क्या बदलेगा?
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ब्रिक्स समूह में ईरान के प्रवेश को विश्व व्यवस्था में परिवर्तन का एक बड़ा संकेत माना जा रहा है, जिसका क्षेत्र और दुनिया पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा।
(last modified 2023-08-25T04:42:18+00:00 )
Aug २५, २०२३ ०७:०६ Asia/Kolkata
  • ब्रिक्स में ईरान की सदस्यता से क्या बदलेगा?

ब्रिक्स समूह में ईरान के प्रवेश को विश्व व्यवस्था में परिवर्तन का एक बड़ा संकेत माना जा रहा है, जिसका क्षेत्र और दुनिया पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा।

ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद से ही अमरीका और ब्रिटेन ने ईरान को विश्व में अलग-थलग करने की नीति अपना रखी थी, जिसके लिए उन्होंने अपने समर्थक देशों के साथ मिलकर इस्लामी गणतंत्र के ख़िलाफ़ कड़े प्रतिबंध तक लगाए।

इसके बावजूद, ईरान ने अपनी पूरी ताक़त से साम्राज्यवादी शक्तियों का मुक़ाबला किया और कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। जिसके नतीजे में दुनिया भर के देश उसे गले लगा रहे हैं, जबकि अमरीका अपनी वर्चस्ववादी नीतियों के कारण, अलग-थलग पड़ता जा रहा है।

गुरुवार को जोहानसबर्ग में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ईरानी राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी ने भाग लिया और डॉलर को साइडलाइन करने के ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रयासों का समर्थन किया।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि तेहरान, समूह के सदस्यों के बीच डॉलर के बजाए राष्ट्रीय मुद्राओं में भुगतान और वित्तीय विकास के लिए ब्रिक्स तंत्र को मज़बूत करने की दिशा में ब्रिक्स के सफल प्रयासों का पुरज़ोर समर्थन करता है।

ब्रिक्स में ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीक़ा शामिल थे, लेकिन गुरुवार को शिखर सम्मेलन के अंतिम दिन इस समूह में अर्जेंटीना, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इथियोपिया और मिस्र को भी शामिल करने का एलान किया गया। msm