पवित्र प्रतिरक्षा की महानता को पहचानना चाहियेः सर्वोच्च नेता
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पवित्र प्रतिरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने वाले सिपाहियों ने आज ईरान की इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता से मुलाकात की।
(last modified 2023-09-20T09:09:32+00:00 )
Sep २०, २०२३ १३:१७ Asia/Kolkata

पवित्र प्रतिरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने वाले सिपाहियों ने आज ईरान की इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता से मुलाकात की।

इस मुलाकात में इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली खामनेई ने फरमाया कि हम आज तक पवित्र प्रतिरक्षा को विवरण के साथ न तो इसे सही तरह से पहचान सके और न ही पहचनवा सके।

पवित्र प्रतिरक्षा सप्ताह आरंभ होने के अवसर पर शहीदों के कुछ परिजनों, कलाकारों, लेखकों, सहायता कर्मियों और पवित्र प्रतिरक्षा के दौरान सक्रिय भूमिका निभाने वाले सिपाहियों ने आज सुबह इमाम ख़ुमैनी रह. इमाम बारगाह में इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता से मुलाकात की। इस मुलाकात में इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने कहा कि पवित्र प्रतिरक्षा की घटना हमारे देश के इतिहास की महत्वपूर्ण घटना है, इस महत्वपूर्ण घटना को पहचानना चाहिये और आने वाली पीढ़ियों को इससे पहचनवाना चाहिये।

इसी प्रकार इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने कहा कि अगर आने वाली पीढ़ियां पवित्र प्रतिरक्षा के महत्वपूर्ण और अर्थपूर्ण पहलुओं को पहचान जायें और इस बात को जान जायें कि ईरानी राष्ट्र किस तरह सफलता व विजय तक पहुंचा तो वे पूरी शक्ति के साथ डट जायेंगी। इसी प्रकार सर्वोच्च नेता ने कहा कि इस पहचान में बहुत बड़े -बड़े पाठ मौजूद हैं।

इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने कहा कि पवित्र प्रतिरक्षा को कई आयामों से देखा जा सकता है। उसका एक पहलु व आयाम वह चीज़ है जिसके लिए प्रतिरोध किया गया। उसका एक पहलु यह है कि यह प्रतिरोध किस चीज़ के मुकाबले में किया गया? उसका तीसरा पहलु यह है कि इस प्रतिरोध को किन लोगों के माध्यम से अंजाम दिया गया? वे कौन लोग थे? इस प्रतिरोध का चौथा पहलु यह है कि इस प्रतिरोध के परिणाम और उसकी उपलब्धियां क्या रहीं?

इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने कहा कि इस्लामी क्रांति की रक्षा के लिए प्रतिरोध किया गया और उसका परिणाम इस्लामी गणतंत्र है और पूरे देश की संप्रभुता के लिए प्रतिरोध किया गया और सामने वाले पक्ष ने इन तीनों चीनों पर हमला किया था। दुश्मन का बुनियादी और महत्वपूर्ण लक्ष्य देश की संप्रभुता नहीं थी बल्कि इस्लामी क्रांति थी। दुश्मन इस क्रांति का दमन करना चाहते थे। इसी प्रकार इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने कहा कि हमारी क्रांति जनक्रांति, धार्मिक और किसी पर निर्भर नहीं थी और उसने दूसरे पर निर्भर व्यवस्था को उखाड़ फेंका और देश में नयी व्यवस्था को स्थापित किया।

इसी प्रकार उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था में लोगों और महान ईश्वर की इच्छा को दृष्टि में रखा गया है और इतिहास में उसका कोई अतीत नहीं है और दुश्मन इसका दमन कर देना चाहता था और आज भी उसका लक्ष्य वही है और दुश्मन का लक्य आज भी इस्लामी गणतंत्र है।

उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया ने ईरान के खिलाफ युद्ध में भाग लिया, यह अतिशयोक्ति नहीं है उस समय की जितनी शक्तियां थीं सबने ईरान के खिलाफ युद्ध में भूमिका निभाई, अमेरिका, यूरोपीय देशों और पूर्वी ब्लाक हर एक ने अपने तरीके से इस्लामी क्रांति के खिलाफ युद्ध में अपनी भूमिका निभाई।

इसी प्रकार सर्वोच्च नेता ने कहा कि पवित्र प्रतिरक्षा की उपलब्धियां एक दो नहीं हैं। इसके लिए दसियों खंडों पर आधारित एक किताब की ज़रूरत है। पूरी दुनिया सद्दाम का समर्थन कर रही थी ताकि प्रतिरोध को खत्म कर दे और आठ वर्षों तक कोशिश की परंतु इस देश की एक इंच भूमि भी कम न कर सकी। MM

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