बसीज इस्लामी क्रांति के अमिट रौशनियों में से एक हैः जनरल बाक़ेरी
ईरान की आर्म्ड फ़ोर्सेज़ के चेयरमैन जनरल स्टाफ़ जनरल सरदार मुहम्मद बाक़ेरी ने स्वयंसेवी संस्था बसीज के गठन की वर्षगांठ के अवसर पर भाषण देते हुए कहा कि 5 आज़र बराबर 26 नवम्बर की तारीख़, इमाम ख़ुमैनी के फ़रमान पर बसीज के गठन की यादगार है जो इस्लामी क्रांति के अमिट रौशनियों में से एक है।
जनरल बाक़ेरी ने कहा कि बसीज ईरान की जनता के लिए बरकतों का स्रोत जिसने बड़ी मूल्यवान सेवाएं की हैं इस संगठन का नाम इतिहास में अमर हो चुका है। उन्होंने कहा कि यह संगठन देश की ज़रूरतों के अनुरूप समाज में ज़िम्मेदार युवाओं के परवान चढ़ने की गैरेंटी साबित होगी।
बसीज ईरान का देश व्यापी संगठन है जो अलग अलग विभागों में अपनी निःस्वार्थ और निःशुल्क सेवा के लिए जाना जाता है।
ईरान में इस्लामी क्रांति सफल होने के बाद देश और क्रांति के ख़िलाफ़ दुश्मनों की भयानक साज़िशें पूरी गति से शुरू हो गईं, अमरीका के नेतृत्व में यह साज़िशें कई प्रकार की थीं जिनका लक्ष्य ईरान की इस्लामी क्रांति और उससे निकलने वाले इस्लामी लोकतांत्रिक सिस्टम को नाकाम बनाना और ईरान को कई टुकड़ों में बांट देना था।
इन हालात को देखते हुए इस्लामी क्रांति और इस्लामी लोकतांत्रिक व्यवस्था के वास्तुकार इमाम ख़ुमैनी ने 26 नवम्बर 1979 को बसीज के गठन का फ़रमान जारी किया था।
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