शीराज़ का बाग़े इरम/ईरान के अद्वितीय ऐतिहासिक बाग़ों के नमूने
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शीराज़ के बाग़े इरम में एक ईरानी परिवार
पार्सटुडे-बाग़े इरम, ईरान के अद्वितीय ऐतिहासिक बाग़ों का नमूना और शीराज़ के बाग़ों का रत्न है। इसका क्षेत्रफल 110 स्कवाएर मीटर है। इसको आयताकार रुप में बनाया गया है। इसमे पाए जाने वाले सर्व के पेड़, विश्व विख्यात हैं।
ईरान के शीराज़ नगर को न केवल विश्व विख्यात कवियों सादी और हाफ़िज़ के नाम से जाना जाता है बल्कि इसको बाग़ों के शहर और फूलों तथा बुलबुल के नगर के रूप में भी विश्व में ख्याति हासिल हुई है। वहां के मश्हूर और दर्शनीय स्थलों में से एक, बाग़े इरम भी है।
शीराज़ के इरम बाग़ का इतिहासः
इरम बाग़ के वास्तविक इतिहास के बारे में बहुत से रहस्य पाए जाते हैं। इसके बनाए जाने के इतिहास का प्रथम प्रमाण, विभिन्न यात्रा वृतांतों में मिलते हैं।
इरम शब्द, अरबी भाषा से लिया है जिसका एक अर्थ स्वर्ग भी होता है। यह शब्द पवित्र क़ुरआन में कई बार आया है।
प्रमाण बताते हैं कि इरम बाग़ का इतिहास सलजूक़ी काल से संबन्धित है। इसको अताबक क़राहे ने शाह सिंजर सलजूक़ी के काल में अर्थात 1100-1173 ईसवी के दौरान बनवाया था।
वर्तमान काल में शीराज़ के इरम बाग़ की इमारत को लगभग 200 साल पहले क़ाजार शासन काल में बनवाया गया था। इस इमारत की प्रमुख विशेषता, इसका दो मंज़िला बरामदा है। इसका ऊपरी भाग हेलाली या क्रीसेंट के आकार में है जिसपर बहुत ही सुन्दर ढंग से काशीकारी की गई है जिनपर इतिहास और साहित्य से संबन्धित कुछ लोगों के चित्र अंकित हैं।
क़ाजार काल में बाग़े इरम, 75 वर्षों तक क़शक़ाई जाति के प्रमुखों के नियंत्रण में था जिन्होंने वहां पर इमारत बनवाई। बाद में नासिरुद्दीन शाह के कल में अन्य इमारत बनवाई गई जो अब भी मौजूद है। इस इमारत को वास्तुकला, पेंटिंग, टाइलिंग और प्लास्टर जैसी कला के हिसाब से ईरानी वास्तुकला की उत्कृष्ट कृति माना जाता है।
इस तीन मंज़िला इमारत को रंगारंग टाइल्स और बहुत ही ख़ूबसूरत प्लास्टर के काम से सुसज्जित किया गया है। इसके निचले तबक़े की इमारत को, जो वास्तव में भूमिगत है, गर्मी के मौसम में आराम के लिए प्रयोग किया जाता था। ऊपरी दो मंज़िलों में पर्सपोलिस की शैली में स्तंभ बने हुए हैं।
शीराज़ के बाग़े इरम की अन्य इमारतें-
जिस काल में इमारतों को ठंडा रखने के लिए चीज़ें नहीं हुआ करती थीं, उस काल में यहां के रहने वाले, भीषण गर्मी से बचने के लिए इमारत के भूमिगत हिस्से या तहख़ाने में चले जाते थे। इसकी दीवारों और उनके फर्श पर टाएल्स का काम किया गया है ताकि गर्मियों में लोगों के लिए यहां पर एक साथ बैठने की संभावना पैदा हो सके।
बाग़ के दरवाज़े और उसकी खिड़कियां भी काफ़ी ख़ूबसूरत हैं। इस इमारत में लोहे की कई जालीदार खिड़कियां बनाई गई हैं ताकि प्रकाश, ठीक से भीतर आ सके। इमारत के दरवाज़ों में सामान्यतः सागौन की लकड़ी का प्रयोग किया गया है। काफ़ी समय तक बाक़ी रहने वाले सागौन की लकड़ी के ही कारण उसके दरवाज़े आज भी मौजूद हैं। लकड़ी के इन दरवाज़ों पर जड़ाई का काम किया गया है जो स्वयं में अद्वितीय है।
वृत्ताकार मेहराब, सजीव चित्र, टाइलिंग, बग़ीचे के सामने की बड़ी खिड़कियां, ठोस पत्थर के स्तंभ, प्लास्टर, जड़ाई और नक़्क़ाशी आदि जैसे कामों ने इस इमारत को एसी छवि प्रदान कर दी है जैसी कहीं और दिखाई नहीं देती।
शीराज़ का बाग़े इरम, ईरान के उन 9 मश्हूर बाग़ों में से है जिसको यूनेस्को ने सन 2011 में वैश्विक धरोहर में पंजीकृत किया था।
यूनेस्को ने ईरान के जिन बाग़ों को अपने यहां पंजीकृत किया है उनके नाम इस प्रकार हैं-शीराज़ का बाग़े इरम, फार्स के मर्वदश्त में पासारगाद बाग़, इस्फहान का चेहलसुतून, काशान का फीन बाग़, बेहशहर का अब्बासाबाद, शाहज़ादे केरमान, बीरजंद का अकबरिये, यज़्द का दौलताबाद और यज़्द का ही पहलवानपूर मेहरीज़ बाग़।
पर्यटकों का एक एक मुख्य गंतव्य, बाग़े इरम
ईरान के फार्स प्रांत की सांस्कृतिक धरोहर, पर्यटन और हस्तशिल्पकला विभाग के महानिदेशक मुहम्मद साबित इक़लीदी कहते हैं कि 14 मार्च 2024 से लेकर 3 अप्रैल 2024 के बीच 1311628 पर्टयक बाग़े इरम को देख चुके हैं।
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