ईरानी नौकरशाही का इतिहास सम्माननीय है: प्रोफेसर फरहानी
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पार्सटुडे- ईरानी प्रशासन के स्थायी चेहरे इस बात पर ज़ोर देते हुए कि ईरान में नौकरशाही का इतिहास तीन हज़ार साल से भी अधिक पुराना है, कहा: ईरानी नौकरशाही का इतिहास सम्मानजनक है।
(last modified 2024-05-12T07:26:03+00:00 )
May १२, २०२४ १२:५४ Asia/Kolkata
  • ईरानी नौकरशाही का इतिहास सम्माननीय है: प्रोफेसर फरहानी
    ईरानी नौकरशाही का इतिहास सम्माननीय है: प्रोफेसर फरहानी

पार्सटुडे- ईरानी प्रशासन के स्थायी चेहरे इस बात पर ज़ोर देते हुए कि ईरान में नौकरशाही का इतिहास तीन हज़ार साल से भी अधिक पुराना है, कहा: ईरानी नौकरशाही का इतिहास सम्मानजनक है।

तेहरान विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और ईरानी प्रबंधन का एक स्थायी चेहरा "अली अकबर फरहंगी" द्वारा लिखित किताब "ईरान में नौकरशाही समाजशास्त्र का विश्लेषणात्मक इतिहास" का अनावरण समारोह, 35वें तेहरान अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले में किया गया था।

इस कार्यक्रम में फरहंगी ने "ईरान में नौकरशाही के समाजशास्त्र का विश्लेषणात्मक इतिहास" पुस्तक के बारे में कहा: यह पुस्तक मेरे 50 से अधिक वर्षों के अध्ययन का परिणाम है जो छह जिल्दों में जारी की गई थी, जिनमें से एक का आज अनावरण किया गया। इस किताब में ईरान में नौकरशाही के समाजशास्त्र के विश्लेषणात्मक इतिहास पर नज़र डाली गयी है।

उन्होंने इस किताब के बारे में बताया और इस बात पर ज़ोर दिया कि ईरानी नौकरशाही का इतिहास सम्मानजनक है। उन्होंने कहा:

पुस्तक की पहली जिल्द खंड में, मैंने नौकरशाही के सैद्धांतिक मुद्दों की एक श्रृंखला पर बहस की है जिसे हमारी धरती पर जिसका लिखित इतिहास तीन हज़ार साल से अधिक का है, उस तरह से लागू नहीं किया इसलिए हमारे पूर्वजों ने इसे संरक्षित किया है और अपने ख़ूने दिल से और विभिन्न उतार-चढ़ावों से इसे हमारे सामने पेश किया है ताकि हम इसे और अधिक समृद्ध और बेहतर तरीके से आने वाली पीढ़ियों के सामने पेश कर सकें।

विश्वविद्यालय के इस प्रोफ़ेसर ने कहा: इस पुस्तक श्रंखला की पहली जिल्द में इस्लाम से पहले नौकरशाही का इतिहास, इस्लाम की शुरुआत, पैग़म्बरे इस्लाम (स) के काल के बारे में लिखा गया है जबकि दूसरी जिल्द में बनी उमय्या और बनी अब्बास के ख़लीफ़ाओं का काल लिखा हुआ है।

बनी उमय्या और बनी अब्बास के ख़लीफ़ाओं के काल के बाद, जो 500 वर्षों तक चला, चीन की सीमाओं से लेकर यूरोप के मध्य तक विशाल मुस्लिम हकुमतों में ईरानियों के पदचिन्ह साफ़ तौर पर नज़र आते हैं।

इन देश ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, इसलिए भविष्य के प्रति बहुत आशावान रहना चाहिए।

ईरानी संस्कृति का डीएनए बहुत मजबूत है और उसने मंगोलों को पूरी तरह से बदलने में कामयाबी हासिल की और मुझे इस बात पर बहुत खुशी है कि अपने जीवन के अंतिम वर्षों में, मैं अपने देश के इतिहास पर रोशनी डाल रहा हूं जो बहुत उज्ज्वल है।

ईरान के तालेक़ान शहर में सन 1321 हिजरी शम्सी में जन्में अपने पूरे जीवनकाल में प्रोफेसर अली अकबर फरहंगी ने साहित्य से लेकर धर्मशास्त्र, भाषा, प्रबंधन, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र और कम्युनिकेशन तक विभिन्न क्षेत्रों में अध्ययन और शोध के लिए ख़ुद को समर्पित कर दिया है।

उन्होंने प्रबंधन और कम्युनिकेशन के दो क्षेत्रों में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की और संगठनात्मक कम्युनिकेशन के क्षेत्र में पोस्ट-डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की है।

 तेहरान विश्वविद्यालय के इस मशहूर प्रोफ़ेसर द्वारा दर्जनों मूल्यवान किताबें और लेख प्रकाशित किए गए हैं और सन 1384 हिजरी शम्सी में प्रोफ़ेसर फ़रहंगी ईरान के प्रबंधन का एक स्थायी चेहरा बन सामने आए।

स्रोत:

मेहर समाचार एजेंसी

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