इस्तांबुल में शहरयार अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, हेलो हैदर बाबा
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पार्सटुडे - प्रसिद्ध ईरानी शायर मोहम्मद हुसैन शहरयार को श्रद्धांजलि पेश करने के लिए दूसरा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन तुर्किए के शहर इस्तांबुल में आयोजित किया गया था जिसमें ईरान और तुर्किए के विश्वविद्यालयों के प्रोफ़ेसर और आज़रबाइजान गणराज्य, जॉर्जिया, आर्मेनिया, बांग्लादेश, उज़्बेकिस्तान और ताजेकिस्तान के शोधकर्ता और प्रोफ़ेसर उपस्थिति हुए।
(last modified 2024-12-17T07:49:42+00:00 )
Dec १६, २०२४ ०९:४० Asia/Kolkata
  • इस्तांबुल में शहरयार अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, हेलो हैदर बाबा
    इस्तांबुल में शहरयार अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, हेलो हैदर बाबा

पार्सटुडे - प्रसिद्ध ईरानी शायर मोहम्मद हुसैन शहरयार को श्रद्धांजलि पेश करने के लिए दूसरा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन तुर्किए के शहर इस्तांबुल में आयोजित किया गया था जिसमें ईरान और तुर्किए के विश्वविद्यालयों के प्रोफ़ेसर और आज़रबाइजान गणराज्य, जॉर्जिया, आर्मेनिया, बांग्लादेश, उज़्बेकिस्तान और ताजेकिस्तान के शोधकर्ता और प्रोफ़ेसर उपस्थिति हुए।

सैयद मोहम्मद हुसैन बहजत तबरीज़ी का जन्म 31 दिसम्बर 1906 में हुआ था और उनका देहान्त 23 अगस्त 1988 को हुआ था। उनका उपनाम शहरयार था। वह तबरीज़ के एक प्रसिद्ध ईरानी कवि हैं जो तुर्की, आज़रबाइजानी और फ़ारसी भाषाओं में शेर कहते थे।

शहरयार का सबसे महत्वपूर्ण व प्रसिद्ध शेर "हैदर बाबा ए सलाम" (हैदरबाबा को सलाम) है, जिसका दुनिया की 80 से अधिक ज़िंदा ज़बानों में अनुवाद किया गया है।

पार्सटुडे के अनुसार, इस्तांबुल में ईरान के कल्चरल विभाग की कोशिशों से आयोजित इस कार्यक्रम में इस्तांबुल विश्वविद्यालय के प्रमुख और फ़ारसी भाषा और साहित्य विभाग के डायरेक्टर अली गोएज़लयूज़ ने भाग लिया।

उन्होंने इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध ईरानी शायर शहरयार के कार्यों के कविता प्रेमियों और तुर्की में अदब पर गहरे प्रभाव का ज़िक्र करते हुए कहा: शहरयार को समकालीन दौर में सबसे लोकप्रिय ईरानी शायरों में माना जाना चाहिए।

ईरान के पश्चिमोत्तरी इलाक़े तबरीज़ विश्वविद्यालय के फ़ारसी साहित्य और विदेशी भाषाओं के संकाय के प्रमुख मोहम्मद मेहदीपुर ने प्रोफ़ेसर शहरियार की साहित्यिक पोज़ीशन की सराहना की और कहा: शहरयार न केवल एक शक्तिशाली शायर थे, बल्कि एक सांस्कृतिक शायर भी थे और विभिन्न राष्ट्रों और भाषाओं के बीच पुल का काम करते थे। उनके शेर समान मूल्यों को साझा करते हैं। उन्होंने भाषाई और भौगोलिक सीमाओं से परे एक इंसान का चित्रण किया। उन्होंने विश्व साहित्य के इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी है।

इस्तांबुल में ईरान के वाणिज्य राजदूत अहमद मोहम्मदी ने भी ईरानी साहित्य में इस महान शायर की अहम पोज़ीशन की ओर इशारा किया और कहा: शहरयार एक ऐसे शायर थे जो हमेशा लोगों की समस्याओं और आदर्शों पर ध्यान देते थे और अपने शेरों में वह पवित्रता और ईमानदारी के अग्रदूत थे।

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