सीरिया के हालिया परिवर्तनों के बारे में ईरान के विदेशमंत्रालय का दृष्टिकोण
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पार्सटुडे- विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता के कथनानुसार क्षेत्र के दूसरे देश क्या कहते हैं इससे हटकर ईरान सीरिया में कभी भी किसी व्यक्ति या किसी विशेष पार्टी का समर्थक नहीं रहा है।
(last modified 2025-01-03T06:17:09+00:00 )
Dec १८, २०२४ १३:३९ Asia/Kolkata
  • सीरिया के हालिया परिवर्तनों के बारे में ईरान के विदेशमंत्रालय का दृष्टिकोण
    सीरिया के हालिया परिवर्तनों के बारे में ईरान के विदेशमंत्रालय का दृष्टिकोण

पार्सटुडे- विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता के कथनानुसार क्षेत्र के दूसरे देश क्या कहते हैं इससे हटकर ईरान सीरिया में कभी भी किसी व्यक्ति या किसी विशेष पार्टी का समर्थक नहीं रहा है।

विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बक़ाई ने मंगलवार 17 दिसंबर को पत्रकारों के साथ बैठक में सीरिया के बारे में पूछे गये प्रश्नों का जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि दूसरों को सीरिया के परिवर्तनों के बारे में अपनी बात कहने का हक़ है। जो चीज़ स्पष्ट है वह यह है कि दोहा, आस्ताना और पांच + तीन देशों की बैठक में यानी आस्ताना बैठक के तीन सदस्य देश और पांच अरब देशों की बैठक में जो चीज़ दृष्टिगत थी उसके बारे में सहमति बन चुकी थी और बयान भी जारी हुआ था और इसका उद्देश्य सीरिया की संप्रभुता की सुरक्षा, आतंकवाद को रोकना और सीरियाई सरकार और विरोधियों के मध्य बातचीत आरंभ करना था और यह वह महत्वपूर्ण चिंता थी जिसके संबंध में आस्ताना बैठक और आठ देशों की बैठक में भाग लेने वाले देश समान दृष्टिकोण रखते थे जैसाकि हम देख रहे हैं कि इन्हीं कुछ दिनों के अंदर सीरिया की संप्रभुता पर भीषण हमला हो रहा है।

 

विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ज़ायोनी सरकार ने 50 वर्षों के अंदर सीरियाई सरज़मीन के एक अन्य भाग पर क़ब्ज़ा कर लिया, सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 350 का एकतरफ़ा तौर उल्लंघन किया गया और इस बात से इस चिंता की पुष्टि होती है कि इस्लामी गणतंत्र ईरान और दूसरे देश उन दिनों में भी सीरिया की शांति व सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर चिंतित थे। इस आधार पर दोहा बैठक में भाग लेने वाले देशों की चिंता व प्रयास यह था कि वे सीरिया में इस प्रकार की परिस्थिति को उत्पन्न न होने दें।

 

विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि मैं व्यापक रूप से संकेत करता हूं कि सीरिया में हमारी उपस्थिति एक सिद्धांतिक उपस्थिति थी और हमारा निकलना भी ज़िम्मेदाराना था। हम सीरिया में विस्तारवाद, वर्चस्ववाद और अतीत के साम्राज्यवाद को ज़िन्दा करने की चेष्टा में नहीं थे। जो कुछ सीरिया में हमारे लिए महत्वपूर्ण था वह आतंकवाद के मुक़ाबले में सीरियाई लोगों की सुरक्षा था। आज के दिन को हमारे कैलेंडर में आतंकवाद और अतिवाद से मुक़ाबले का नाम दिया गया है और इस आधार पर हम सीरिया की क़ानूनी सरकार के निमंत्रण पर वहां गये थे।

 

इसी प्रकार विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि सीरिया में हमारी उपस्थिति परामर्शदाता के रूप में थी। हम कभी भी सीरिया में किसी विशेष व्यक्ति या पार्टी के समर्थन के लिए नहीं थे और अंतिम समय तक जो चीज़ हमारे लिए महत्वपूर्ण थे वह क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण देश के रूप में सीरिया की शांति व सुरक्षा थी और हमारा मानना है कि क्षेत्र के हर देश की शांति व सुरक्षा पश्चिम एशिया की शांति व सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। MM

 

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