9 दै, विदेशी साज़िशों के सामने ईरान की राष्ट्रीय एकजुटता का प्रदर्शन
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पार्स-टुडे- ईरान में 9 दी 1388 एक ऐसा यादगार दृश्य था जो उस जनता की सूझ-बूझ, एकता और सचेत उपस्थिति को दर्शाता है जिसने समय पर डटकर खड़े होकर एक बड़ी साज़िश को नाकाम किया और इस्लामी क्रांति के प्रति अपनी निष्ठा को प्रदर्शित किया।
(last modified 2026-01-03T04:50:55+00:00 )
Dec ३१, २०२५ १३:२९ Asia/Kolkata
  • 9 दै 1388 की रैली
    9 दै 1388 की रैली

पार्स-टुडे- ईरान में 9 दी 1388 एक ऐसा यादगार दृश्य था जो उस जनता की सूझ-बूझ, एकता और सचेत उपस्थिति को दर्शाता है जिसने समय पर डटकर खड़े होकर एक बड़ी साज़िश को नाकाम किया और इस्लामी क्रांति के प्रति अपनी निष्ठा को प्रदर्शित किया।

निर्णायक और भाग्यनिर्माता अवसरों पर ईरानी जनता की सचेत, बुद्धिमत्तापूर्ण और उत्तरदायी उपस्थिति हमेशा से इस्लामी क्रांति के सबसे महत्वपूर्ण सहारों में रही है। यही उपस्थिति 9 दी 1388 को एक बार फिर स्पष्ट रूप से दिखाई दी और इस्लामी क्रांति के आदर्शों के प्रति ईरानी राष्ट्र की निष्ठा का एक स्वर्णिम अध्याय इतिहास में दर्ज हो गया।

 

पार्स-टुडे की तस्नीम के हवाले से रिपोर्ट के अनुसार यह महान दिन जन-बोध, धार्मिक आत्मसम्मान और जनता के विलायत-ए-फ़क़ीह के सिद्धांत से गहरे जुड़ाव का प्रतीक है और इसने दिखा दिया कि ईरानी राष्ट्र संवेदनशील मोड़ों पर परिस्थिति और समय की सही पहचान के साथ दुश्मनों की साज़िशों और फूट डालने की कोशिशों के सामने डटकर खड़ा होता है।

 

9 दै वह भव्य मंच था जहाँ ईरानी जनता की गरिमा, स्वतंत्रता और सचेत उपस्थिति प्रकट हुई और लोगों ने मैदान में उतरकर इस्लामी और क्रांतिकारी मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर याद दिलाया। यह व्यापक और अर्थपूर्ण उपस्थिति नेतृत्व के साथ ईरानी राष्ट्र की नई बैअत और समाज की गहराइयों में क्रांति की जीवित आत्मा का स्पष्ट संकेत थी। इसी विशाल जन-समर्थन के बल पर इस्लामी क्रांति दुश्मनियों, दबावों और जटिल साज़िशों के सामने अडिग रह सकी है और पूरी शक्ति के साथ अपने मार्ग पर आगे बढ़ती रही है।

 

9 दी केवल कैलेंडर की एक तारीख़ नहीं है, बल्कि इस्लामी क्रांति के इतिहास में एक जीवंत, स्थायी और रणनीतिक सच्चाई है। यह दिन ईरानी राष्ट्र की धार्मिक आस्था, राजनीतिक सूझ-बूझ और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना के आपसी संबंध का परिणाम है, ऐसा संबंध जो इतिहास को तोड़े-मरोड़े जाने, भुला दिए जाने और लापरवाही से बचाता है। इस दिन ईरानी जनता ने दिखा दिया कि वह दुश्मन और उसकी चालों को भली-भाँति पहचानती है और साज़िशों की धुंध में सत्य का मार्ग नहीं खोएगी।

 

9 दै को ईरानी राष्ट्र ने समय पर और व्यापक उपस्थिति के साथ एक बड़े और निर्णायक इम्तिहान को पार किया और एक गहरी व जड़ जमाई साज़िश को निष्फल कर दिया। यह जन-उभार अवसर-पहचान, विलायत-निष्ठा और उस राष्ट्र की गरिमा का प्रतीक था जिसने विलायत और क्रांति के प्रेम से भरे दिलों में दुश्मनों की चालों को असर करने नहीं दिया। इस दिन की लाखों की रैली केवल भीड़ का प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि राष्ट्रीय एकता और इस्लामी क्रांति के मूल्यों के साथ राष्ट्र के अटूट संबंध की झलक थी।

 

9 दै क्रांति के मित्रों और शत्रुओं दोनों के लिए एक स्थायी सबक है; ऐसा सबक जो याद दिलाता है कि जब भी देश की सुरक्षा, एकता और स्वतंत्रता को ख़तरा होगा, ईरानी जनता सूझ-बूझ और जागरूकता के साथ मैदान में उतरेगी। यह दिन उस राष्ट्र की राजनीतिक परिपक्वता और सामाजिक चेतना का प्रतीक है जो हमेशा अपनी क्रांति, इस्लाम और मातृभूमि का रक्षक रहा है और रहेगा। mm