सामाजिक शिष्टाचार | ईरानी समाज में बड़ों के सम्मान का महत्व
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पार्स टुडे – ईरानी संस्कृति में बड़ों को सदैव बुद्धिमत्ता, अनुभव और सम्मान का प्रतीक माना गया है। सार्वजनिक स्थानों पर उनका ध्यान रखना केवल एक नैतिक दायित्व ही नहीं बल्कि सामाजिक परिष्कार और सभ्यता की पहचान भी है।
(last modified 2026-01-03T11:11:21+00:00 )
Jan ०३, २०२६ १६:३९ Asia/Kolkata
  • ईरानी समाज में बड़ों के सम्मान का महत्व
    ईरानी समाज में बड़ों के सम्मान का महत्व

पार्स टुडे – ईरानी संस्कृति में बड़ों को सदैव बुद्धिमत्ता, अनुभव और सम्मान का प्रतीक माना गया है। सार्वजनिक स्थानों पर उनका ध्यान रखना केवल एक नैतिक दायित्व ही नहीं बल्कि सामाजिक परिष्कार और सभ्यता की पहचान भी है।

ईरानी संस्कृति में बड़ों का स्थान हमेशा विशेष रहा है वे अनुभव, विवेक और सम्मान के प्रतीक हैं। सार्वजनिक जीवन में बड़ों का ख़याल रखना केवल नैतिक कर्तव्य नहीं, बल्कि सामाजिक परिपक्वता का संकेत है।

 

पार्स टुडे की रिपोर्ट के अनुसार यह सरल किंतु मूल्यवान व्यवहार सामूहिक वातावरण को अधिक सौहार्दपूर्ण और शांत बनाता है तथा पीढ़ियों के बीच विश्वास को मज़बूत करता है। जब मेट्रो, बस, कतारों या रोज़मर्रा की बातचीत में बड़ों के स्थान का सम्मान किया जाता है तो एक स्वस्थ समाज और अधिक स्थायी संबंध विकसित होते हैं। बड़ों का सम्मान वास्तव में एक सामाजिक पूँजी है जो व्यक्तिगत शांति और सामूहिक एकता दोनों की गारंटी देता है।

 

दैनिक जीवन में सम्मान की झलकियाँ

 

सार्वजनिक परिवहन में सीट देना: मेट्रो और बस में बड़ों को बैठने के लिए स्थान देना शिष्टाचार और संवेदनशीलता का प्रतीक है।

 

कतारों और सेवाओं में प्राथमिकता: बुज़ुर्गों को सेवाओं का शीघ्र उपयोग करने देना उनके स्थान के प्रति व्यावहारिक सम्मान है।

 

संवाद में शालीनता: आदरपूर्ण लहजा अपनाना ध्यान से सुनना और बड़ों की बात बीच में न काटना।

 

सहायता करना: सड़क पार कराने में मदद, सामान उठाने में सहयोग या भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मार्गदर्शन ये सामाजिक उत्तरदायित्व के उदाहरण हैं।

 

सम्मान के सकारात्मक प्रभाव

 

तनाव में कमी: जब बड़ों को अपने सम्मान का एहसास होता है तो समाज में अधिक शांति स्थापित होती है।

 

पीढ़ियों के बीच विश्वास का सुदृढ़ीकरण: इस व्यवहार से युवा, पूर्ववर्ती पीढ़ियों के साथ गहरा संबंध बनाते हैं।

 

भविष्य के लिए आदर्श: बच्चे और किशोर इस आचरण को देखकर इसे आत्मसात करते हैं और आगे की पीढ़ी तक पहुँचाते हैं।

 

सार्वजनिक जीवन में बड़ों का ख़याल रखना व्यक्तिगत निजता के सम्मान की तरह समाज में विश्वास और शांति की एक अदृश्य दीवार खड़ी करता है। यह सरल किंतु मूल्यवान व्यवहार न केवल सामाजिक एकता को मज़बूत करता है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सकारात्मक उदाहरण भी प्रस्तुत करता है। mm