ईरानी संसद में मान्यता प्राप्त धार्मिक अल्पसंख्यकों के कितने प्रतिनिधि होते हैं?
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ईरान की बारहवीं संसद के चुनावों में मतपेटी के पास एक अल्पसंख्यक महिला की मौजूदगी
पार्स टुडे - ईरान के संविधान के अनुसार ईरान में मौजूद धार्मिक अल्पसंख्यकों को कानून की सीमा के भीतर अन्य लोगों की तरह सम्मान दिया जाता है, वे अपने धार्मिक समारोहों को स्वतंत्र रूप से करने के लिए स्वतंत्र हैं और व्यक्तिगत मामलों में अपने धर्म के अनुसार कार्य करने के लिए अधिकृत हैं।
ईरान के संविधान के अनुच्छेद 64 के अनुसार, प्रत्येक आधिकारिक धार्मिक अल्पसंख्यक ईरान की संसद में एक प्रतिनिधि रख सकता है। पार्स टुडे की रिपोर्ट के अनुसार ईरानी संसद में क्लीमी अल्पसंख्यक के प्रतिनिधि सियामक मोरह सदेक, जिन्होंने आठवीं, नौवीं और दसवीं संसद में सेवा की है, ने कहा: ईरान में हर 300,000 लोगों पर संसद में एक प्रतिनिधि होता है जबकि सभी धार्मिक अल्पसंख्यक जिनकी संख्या 300,000 से कम है, के पास 5 प्रतिनिधि हैं, जो दर्शाता है कि संविधान के कानून निर्माताओं का इरादा ईरान की राजनीतिक प्रक्रियाओं और निर्णयों में अल्पसंख्यक समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
ईरान की ग्यारहवीं संसद में, आरा शावर्दियान ने उत्तरी आर्मेनियाई ईसाइयों का प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने बारहवीं संसद के चुनावों में लगभग 80% वोट प्राप्त करके बारहवीं संसद में उत्तरी ईरान के आर्मेनियाई ईसाइयों के प्रतिनिधि के रूप में चुने गए।
इसके अलावा, रॉबर्ट बेग्लेरियन ने ग्यारहवीं संसद में दक्षिणी ईरान के आर्मेनियाई लोगों का प्रतिनिधित्व किया लेकिन इस कार्यकाल में गगर्ड मंसूरियान बारहवीं संसद में दक्षिणी आर्मेनियाई लोगों के प्रतिनिधि के रूप में चुने गए।
शार्ली एनवे तकिया जिन्होंने ईरानी असीरियाई और क्लेडियन का प्रतिनिधित्व किया, बारहवीं संसद के चुनावों में भी लगभग 90% वोट प्राप्त करने में सक्षम रहे।
क्लीमी समुदाय ने भी ग्यारहवीं संसद के अपने प्रतिनिधि, हमायूँ समेह को बारहवीं संसद के लिए फिर से चुना।
ईरान के ज़रतुश्सी या पारसी समुदाय का प्रतिनिधित्व ग्यारहवीं संसद में एस्फंदियार इख्तियारी ने किया लेकिन इस बार सुश्री बहशीद बरखोदर बारहवीं संसद में जरथुस्त्रियों की प्रतिनिधि के रूप में चुनी गईं। MM