एडमिरल सय्यारी: युद्ध की स्थिति में दुश्मन को भारी नुकसान होगा
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पार्स टुडे – ईरान की इस्लामी गणराज्य की सेना के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ और समन्वय उपकमांडर ने दुश्मनों की धमकियों के बारे में कहा कि ईरान की इस्लामी सेना हमेशा किसी भी प्रकार के ख़तरे का सामना करने के लिए तैयार है और यदि कोई घटना घटती है तो निस्संदेह दुश्मन को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
(last modified 2026-01-28T13:40:08+00:00 )
Jan २८, २०२६ १९:०५ Asia/Kolkata
  • ईरानी सेना के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ और समन्वय उपकमांडर अमीर एडमिरल हबीबुल्लाह सय्यारी
    ईरानी सेना के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ और समन्वय उपकमांडर अमीर एडमिरल हबीबुल्लाह सय्यारी

पार्स टुडे – ईरान की इस्लामी गणराज्य की सेना के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ और समन्वय उपकमांडर ने दुश्मनों की धमकियों के बारे में कहा कि ईरान की इस्लामी सेना हमेशा किसी भी प्रकार के ख़तरे का सामना करने के लिए तैयार है और यदि कोई घटना घटती है तो निस्संदेह दुश्मन को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

पार्स टुडे की रिपोर्ट के अनुसार अमीर मीर एडमिरल हबीबुल्लाह सय्यारी ईरानी सेना के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ और समन्वय उपकमांडर ने बुधवार 8 बहमन 1404 को अपने संबोधन में ईरान की सशस्त्र सेनाओं की क्षमताओं पर ज़ोर देते हुए कहा: हम ज़मीन, हवा और समुद्र हर क्षेत्र में किसी भी ख़तरे के सामने डटकर खड़े हैं और सेना हमेशा किसी भी प्रकार की धमकी का मुकाबला करने के लिए तैयार है।

 

ईरानी सेना के समन्वय उपकमांडर ने ईरान के ख़िलाफ़ दुश्मनों द्वारा चलाए जा रहे संज्ञानात्मक और मिश्रित युद्ध की ओर इशारा करते हुए कहा: ईरान के जागरूक और सूझ-बूझ वाले अधिकारी और जनता दुश्मन की चालों का सामना करने के तरीक़े जानती है और एकता आपसी सहयोग और सामंजस्य के साथ समय पर दुश्मन को जवाब देती है।

 

एडमिरल सियारी ने 22 दैय की गाथा के दुश्मनों की साज़िशों को नाकाम करने में प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा: जब दुश्मन अन्य मोर्चों पर नाकाम हो जाते हैं तो वे सॉफ़्ट वॉर और हाइब्रिड वॉर के क्षेत्र में दबाव बनाते हैं लेकिन ईरान की जागरूक जनता जानती है कि वर्तमान परिस्थितियों में मुकाबले का रास्ता एकता, संगठन और आपसी मेल-जोल है। दुश्मन इस एकता को तोड़ना चाहता है लेकिन वह निश्चित रूप से सफल नहीं होगा। उन्होंने ईरानी राष्ट्र की समझदारी और सूझ-बूझ पर ज़ोर देते हुए कहा: 12 दिनों के थोपे गए युद्ध के बाद जनता ने एक बार फिर मैदान में अपनी सचेत उपस्थिति दिखाकर दुश्मन की साज़िश को नाकाम कर दिया।

 

ईरान की इस्लामी गणराज्य की सेना के समन्वय उपकमांडर ने आगे क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना जहाज़ों की मौजूदगी को लेकर विदेशी मीडिया द्वारा बनाए जा रहे माहौल की ओर इशारा करते हुए कहा: वर्ष 1359 से वे तोपों वाले जहाज़ों की कूटनीति लागू करना चाहते थे ताकि हमें डराया जा सके लेकिन इमाम ख़ुमैनी (रह.) ने क्षेत्र में अमेरिकी जहाज़ों की मौजूदगी के बारे में कहा था कि अगर मैं वहाँ होता और यह देखता तो अपनी चप्पल से ही उसे मार देता इस कथन में एक गहरा और शिक्षाप्रद अर्थ निहित है।

 

एडमिरल सय्यारी ने दुश्मनों की बकवास पर ईरान की इस्लामी सेना के संदेश के बारे में ज़ोर देते हुए कहा: सेना पूरी आस्था के साथ तैयार है कि जैसे 8 साल के पवित्र रक्षा युद्ध और 12 दिनों के युद्ध में किया वैसे ही जनता के सर्वांगीण समर्थन के साथ देश की क्षेत्रीय अखंडता, स्वतंत्रता और ईरान की इस्लामी गणराज्य की पवित्र व्यवस्था की रक्षा करे और अपने मिशन को सर्वोत्तम रूप से अंजाम दे। mm