सक्रिय कूटनीति, ईरान के परमाणु मुद्दे का कोई सैन्य समाधान नहीं है
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ईरान विदेश संबंध रणनीति परिषद के सचिव जलाल दहक़ानी फ़िरोज़ाबादी
पार्स टुडे - ईरान विदेश संबंध रणनीति परिषद के सचिव ने जोर देकर कहा कि 12-दिवसीय युद्ध के अनुभव ने तेहरान का वाशिंगटन के प्रति अविश्वास बढ़ा दिया है, लेकिन अमेरिका का वार्ता की मेज पर वापस लौटना दर्शाता है कि परमाणु मुद्दे के समाधान का मार्ग विशुद्ध रूप से राजनयिक है।
इरानियन स्टूडेंट न्यूज़ एजेन्सी (इस्ना) के साथ साक्षात्कार में ईरान विदेश संबंध रणनीति परिषद के सचिव 'जलाल दहक़ानी फ़िरोज़ाबादी' ने मस्कट में ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता के नए दौर के आयोजन का उल्लेख करते हुए कहा: 12-दिवसीय युद्ध और ईरान की परमाणु सुविधाओं पर हमले के अनुभव ने वार्ता के मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक वातावरण को भारी बना दिया है और अमेरिका के प्रति अविश्वास के स्तर को बढ़ा दिया है।
दहक़ानी फ़िरोज़ाबादी के अनुसार, पिछली वार्ताओं में यह धारणा थी कि अमेरिका यदि ईरान के साथ अपने उद्देश्यों पर समझौता नहीं कर पाता तो वह सैन्य विकल्प का उपयोग कर सकता है, लेकिन अब वाशिंगटन के लिए यह स्पष्ट हो गया है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम का कोई सैन्य समाधान नहीं है।
ईरान विदेश संबंध रणनीति परिषद के सचिव ने यह कहते हुए कि अमेरिकियों ने फिर से वार्ता की ओर रुख किया है, स्पष्ट किया: यह अपने आप में एक उपलब्धि है और दर्शाता है कि दूसरा पक्ष राजनयिक समाधान की आवश्यकता को समझ चुका है, हालाँकि सावधानी और सबसे बुरे परिदृश्यों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
दहक़ानी फ़िरोज़ाबादी ने इस बात पर जोर देते हुए कि "रणक्षेत्र और कूटनीति एक सिक्के के दो पहलू हैं", आगे कहा: मुख्य निरोध रक्षा क्षमता के मार्ग से प्राप्त होता है, लेकिन कूटनीति की भी निरोधक भूमिका होती है और किसी को भी दूसरे का इंतजार नहीं करना चाहिए।
ईरान विदेश संबंध रणनीति परिषद के सचिव ने ओमान और कतर के लिए ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव 'अली लारीजानी' की यात्रा को वार्ताकारों की स्थिति को मजबूत करने की दिशा में मूल्यांकन करते हुए कहा: वार्ता के बारे में ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी का परामर्श महत्वपूर्ण, आश्वस्त करने वाला और विश्वास पैदा करने वाला है और यह दर्शाता है कि ईरान एकजुटता और एकमतता के साथ कूटनीति के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।
दहक़ानी फ़िरोज़ाबादी ने क्षेत्र के देशों की भूमिका के बारे में भी स्पष्ट किया: कई क्षेत्रीय खिलाड़ी इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि युद्ध सभी के लिए हानिकारक है और वे एक व्यापक संघर्ष को रोकने का प्रयास कर रहे हैं, यह एक क्षमता है जो वार्ता के मार्ग को मजबूत करने में सहायता कर सकती है। (AK)
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