कमांडर सफ़वी: "दुश्मन ईरान की रक्षा क्षमता को कमज़ोर नहीं कर सका"
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पार्स टुडे – सर्वोच्च कमांडर (नेता) के सहायक और वरिष्ठ सलाहकार ने ईरान के खिलाफ हाल के युद्ध के बारे में कहा: "अमेरिका और ज़ायोनी शासन इस्लामिक गणराज्य को कमजोर करने, आंतरिक एकता को बिगाड़ने और क्षेत्रीय समीकरणों को बदलने के उद्देश्य से इस युद्ध में शामिल हुए, लेकिन वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफल रहे।"
(last modified 2026-07-13T11:49:51+00:00 )
Jul १३, २०२६ १७:१८ Asia/Kolkata
  • सरलश्कर सैय्यद यहया रहीम सफ़वी, सर्वोच्च कमांडर के सहायक और वरिष्ठ सलाहकार
    सरलश्कर सैय्यद यहया रहीम सफ़वी, सर्वोच्च कमांडर के सहायक और वरिष्ठ सलाहकार

पार्स टुडे – सर्वोच्च कमांडर (नेता) के सहायक और वरिष्ठ सलाहकार ने ईरान के खिलाफ हाल के युद्ध के बारे में कहा: "अमेरिका और ज़ायोनी शासन इस्लामिक गणराज्य को कमजोर करने, आंतरिक एकता को बिगाड़ने और क्षेत्रीय समीकरणों को बदलने के उद्देश्य से इस युद्ध में शामिल हुए, लेकिन वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफल रहे।"

पार्स टुडे के अनुसार सरलश्कर सैय्यद यहया रहीम सफ़वी ने अमेरिका और ज़ायोनी शासन के ईरान पर सैन्य हमले और क्रांति के नेता की हत्या को दुश्मन की सबसे बड़ी रणनीतिक गलती बताते हुए कहा:

"दुश्मन न केवल अपने लक्ष्यों तक पहुँचा बल्कि इस कार्य ने राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया और ईरानी राष्ट्र की एकजुटता को बढ़ाया।"

 

उन्होंने जोर देकर कहा:

"राष्ट्रीय एकता नेतृत्व का समर्थन और आंतरिक शक्ति को मजबूत करना, युद्ध की स्थितियों से उबरने की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताएँ हैं।"

 

सर्वोच्च कमांडर (नेता) के सहायक और वरिष्ठ सलाहकार ने, क्रांति के शहीद नेता के जनाजे में लोगों की व्यापक उपस्थिति का उल्लेख करते हुए इस समारोह को समकालीन इतिहास की सबसे बड़ी जन सभाओं में से एक बताया और कहा:

"तेहरान, क़ुम, मशहद, नजफ और कर्बला में ईरानी लोगों की व्यापक उपस्थिति राष्ट्र के इस्लामी क्रांति के आदर्शों के साथ गहरे संबंध की अभिव्यक्ति थी और विश्व मीडिया में व्यापक रूप से प्रतिध्वनित हुई।"

 

सरलश्कर सफ़वी ने कहा:

"यह उपस्थिति दिखाती है कि इस्लामी क्रांति की सामाजिक पूंजी अभी भी जीवित और गतिशील है और दुश्मन का मनोवैज्ञानिक अभियान और दबाव, इस संबंध को कमजोर नहीं कर सका।"

 

सरलश्कर सफ़वी ने अमेरिका के ईरान के खिलाफ हाल के युद्ध के रणनीतिक प्रभावों का उल्लेख करते हुए कहा:

"जिस प्रकार आशूरा का आंदोलन दुनिया के स्वतंत्र लोगों को प्रेरित करता है उसी प्रकार क्रांति के शहीद नेता और इस मार्ग के अन्य शहीदों का रक्त, स्वतंत्र राष्ट्रों के बीच प्रतिरोध की भावना को मजबूत करेगा और इसका प्रभाव ईरान की सीमाओं से परे होगा।"

 

सर्वोच्च कमांडर (नेता) के सहायक और वरिष्ठ सलाहकार ने, वर्तमान संवेदनशील परिस्थितियों से उबरने में लोगों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा:

"इस्लामिक गणराज्य ईरान ने पिछले चार दशकों में विश्वास, एकता और लोगों की उपस्थिति पर भरोसा करके कई संकटों को पार किया है और आज भी राष्ट्रीय एकता बनाए रखने आंतरिक शक्ति को मजबूत करने और प्रतिरोध की भावना को जारी रखने के साथ वह इस चरण से भी सफलतापूर्वक गुज़रेगा।" mm