बक़ाई: "अमेरिका ने तीसरी बार कूटनीति को धोखा दिया"
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पार्स टुडे – ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा: "अमेरिका ने इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन का स्पष्ट और घोर उल्लंघन करके तीसरी बार कूटनीति को धोखा दिया।"
(last modified 2026-07-27T13:09:06+00:00 )
Jul २७, २०२६ १८:३७ Asia/Kolkata
  • इस्माइल बक़ाई, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता
    इस्माइल बक़ाई, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता

पार्स टुडे – ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा: "अमेरिका ने इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन का स्पष्ट और घोर उल्लंघन करके तीसरी बार कूटनीति को धोखा दिया।"

पार्स टुडे के अनुसार 'इस्माइल बक़ाई' ने ऑस्ट्रियाई टेलीविजन चैनल ORF के साथ एक साक्षात्कार में कहा:

"इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन एक लंबा और जटिल दस्तावेज़ नहीं है; बल्कि यह 14 खंडों वाला एक छोटा समझौता ज्ञापन है और पूरी दुनिया को उम्मीद थी कि कम से कम इस बार संयुक्त राज्य अमेरिका अपने दायित्वों का पालन करेगा लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका ने जो किया वह इस समझौते के विभिन्न प्रावधानों का स्पष्ट और घोर उल्लंघन था और तीसरी बार कूटनीति को धोखा दिया गया।"

 

उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कि "ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाजों के सुरक्षित मार्ग को सुविधाजनक बनाने के लिए अपने सभी दायित्वों का पालन किया है" जलडमरूमध्य में वर्तमान स्थिति के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के कार्यों को सीधे जिम्मेदार बताया।

 

"वाशिंगटन और तेहरान राजनयिक चैनलों के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान कर रहे हैं"

 

इस्लामिक गणराज्य ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ईरान और अन्य पक्षों के बीच राजनयिक चैनलों की स्थिति के बारे में एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि "अमेरिकियों के साथ संदेशों का आदान-प्रदान जारी है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि "वर्तमान परिस्थितियों में तेहरान की मुख्य प्राथमिकता राष्ट्रीय संप्रभुता क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना और अमेरिकी युद्ध अपराधों से ईरानी नागरिकों की सुरक्षा करना है।" प्रवक्ता ने कहा कि "मध्यस्थ अपनी भूमिका निभा रहे हैं लेकिन चूँकि ईरान बमबारी और सैन्य हमलों के अधीन है मुख्य ध्यान प्रतिरोध और राष्ट्रीय रक्षा पर केंद्रित है।"

 

"हरमुज़ जलडमरूमध्य में हाल के व्यवधानों की जिम्मेदारी"

 

हरमुज़ जलडमरूमध्य में हाल के व्यवधानों के कारण के बारे में एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने जोर देकर कहा कि "ईरान ने दशकों से सद्भावना के साथ इस रणनीतिक जलमार्ग और फार्स की खाड़ी की सुरक्षा प्रदान की है; वह भी ऐसे समय में जब वह कई वर्षों से सबसे कड़े प्रतिबंधों के अधीन रहा है।" उन्होंने हाल की घटनाओं में ईरान की किसी भी भूमिका को खारिज करते हुए कहा कि "सभी वर्तमान अशांति 28 फरवरी से अमेरिका और इज़राइल के आक्रमण का प्रत्यक्ष परिणाम है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है या केवल एक घटना पर ध्यान केंद्रित नहीं किया जा सकता है।" बक़ाई ने जोर देकर कहा कि "अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को यह समझना चाहिए कि ईरान को दूसरों के गलत कार्यों के लिए दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।"

 

"ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने में अमेरिकी दायित्वों का उल्लंघन"

 

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ईरानी अवरुद्ध संपत्तियों को मुक्त करने के अपने दायित्व के प्रति अमेरिकी प्रतिबद्धता के बारे में एक प्रश्न के उत्तर में घोषणा किया कि "यह प्रक्रिया पूरी तरह से रुक गई है।" उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कि "ये संपत्तियाँ स्वयं ईरान की हैं और अमेरिकी वित्तीय सहायता नहीं हैं" कहा कि "वाशिंगटन ईरान को अपनी संपत्तियों तक मुफ्त पहुँच प्रदान करने के लिए बाध्य था लेकिन एक बार फिर वादाखिलाफी के साथ उसने व्यावहारिक रूप से समझौता ज्ञापन के सभी प्रावधानों जिसमें यह खंड भी शामिल है का उल्लंघन किया।"

 

"क्षेत्र में शांति की संभावना"

 

बक़ाई ने यह कहते हुए कि "ईरानियों ने कभी भी युद्ध नहीं चाहा है और उन पर हमला किया गया है" जोर देकर कहा कि, "ईरान अपनी संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और सम्मान की रक्षा में दृढ़ संकल्पित है।" उन्होंने क्षेत्र में शांति की संभावना के बारे में कहा कि "शांति प्राप्त करना उन ताकतों की मौजूदगी में आसान नहीं है जो हमेशा युद्ध की तलाश में रहती हैं और एक नरसंहार शासन के कार्यों को देखते हुए जिसने पिछले आठ दशकों में क्षेत्रीय देशों के खिलाफ युद्ध छेड़े हैं।"

 

"मानवाधिकारों की स्थिति के बारे में पश्चिमी दावों पर ईरान का दृष्टिकोण"

 

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि "यूरोप एक ओर ईरान में मानवाधिकारों के बारे में उपदेश नहीं दे सकताऔर दूसरी ओर कब्जे वाले फ़िलिस्तीन में नरसंहार के खिलाफ चुप रह सकता है।" उन्होंने यूरोपीय लोगों के शब्दों और कार्यों के बीच समन्वय की मांग की और याद दिलाया कि "वे कुछ अपराधियों की फाँसी के बारे में अपनी चिंता व्यक्त कर सकते हैं लेकिन मीनाब और लामर्द जैसे शहरों में ईरानी बच्चों और छात्रों के नरसंहार के खिलाफ चुप रह सकते हैं।" mm