ईरान के उपराष्ट्रपति: फ़ार्सी भाषी देशों और क्षेत्रों का संघ बनाया जाए
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पार्सटुडे – ईरान के उपराष्ट्रपति ने ईरान और ताजिकिस्तान के व्यापक सांस्कृतिक, सभ्यतागत और भाषाई समानताओं का उल्लेख करते हुए, फ़ारसी भाषी देशों और क्षेत्रों के एक संघ के गठन का प्रस्ताव रखा, और कहा कि इस विषय को दोनों देशों के अधिकारियों की बैठकों और यात्राओं में गंभीरता से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
(last modified 2026-08-16T11:06:11+00:00 )
Aug १६, २०२६ १६:३१ Asia/Kolkata
  • ईरान के उपराष्ट्रपति की ताजिकिस्तान के अधिकारियों से मुलाक़ात
    ईरान के उपराष्ट्रपति की ताजिकिस्तान के अधिकारियों से मुलाक़ात

पार्सटुडे – ईरान के उपराष्ट्रपति ने ईरान और ताजिकिस्तान के व्यापक सांस्कृतिक, सभ्यतागत और भाषाई समानताओं का उल्लेख करते हुए, फ़ारसी भाषी देशों और क्षेत्रों के एक संघ के गठन का प्रस्ताव रखा, और कहा कि इस विषय को दोनों देशों के अधिकारियों की बैठकों और यात्राओं में गंभीरता से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

पार्सटुडे की रिपोर्ट के अनुसार, मोहम्मद रज़ा आरिफ ने ताजिकिस्तान के ऊर्जा और जल संसाधन मंत्री डेलिर जुमा और उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में, यह कहते हुए कि दोनों देशों की रणनीति सभी स्तरों पर संबंधों का विकास है, आगे कहा: "सहयोग के विस्तार के रास्ते में कोई गंभीर बाधा नहीं है, और सबसे महत्वपूर्ण समस्या नौकरशाही है, जिसे द्विपक्षीय बातचीत बढ़ाकर दूर किया जाना चाहिए। संयुक्त आयोग का आयोजन भी राजनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक, वैज्ञानिक, तकनीकी, ऊर्जा और सांस्कृतिक संबंधों के विकास के लिए दोनों देशों के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।"

ईरान के उपराष्ट्रपति ने हाल के वर्षों में ईरान और ताजिकिस्तान के आर्थिक और व्यापारिक संबंधों की वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा: "इन प्रगतियों के बावजूद, हम अभी भी वांछित स्तर से दूर हैं। दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएँ एक-दूसरे की पूरक हो सकती हैं, और सहयोग के विस्तार में दोनों पक्षों की आवश्यकताओं और क्षमताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।"

आरिफ ने ईरान की वैज्ञानिक, तकनीकी और इंजीनियरिंग क्षमताओं का उल्लेख करते हुए कहा: "इस्लामी गणराज्य ईरान अपनी वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों को मित्र और पड़ोसी देशों को उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।"

उन्होंने आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों के विकास को राजनीतिक संबंधों की निरंतरता के लिए एक सहारा बताते हुए कहा: "ईरान और ताजिकिस्तान में गहन सांस्कृतिक, सभ्यतागत और भाषाई समानताएँ हैं, और पर्यटन के विकास और साझा विरासत के पुनरुद्धार के लिए इस क्षमता का उपयोग किया जाना चाहिए। दोनों देशों के पिछले सांस्कृतिक समझौतों को भी संबंधित मंत्रियों द्वारा गंभीरता से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।"

ईरान के उपराष्ट्रपति ने आगे 'फ़ार्सी भाषी देशों और क्षेत्रों का संघ' स्थापित करने का प्रस्ताव रखा और कहा: "ऐसा संघ फ़ारसी भाषी क्षेत्र के सांस्कृतिक और सभ्यतागत सहयोग के स्तर को बढ़ा सकता है, और इसके निर्माण को दोनों देशों के अधिकारियों की यात्राओं और बैठकों में गंभीरता से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।" (AK)

 

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